Millath Co-operative Bank Ltd- मिलथ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड को आरबीआई ससपैंड कर दिया गया

Safalta Experts Published by: Nikesh Kumar Updated Thu, 23 Jun 2022 11:40 AM IST

Millath Co-operative Bank Ltd : मिलथ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, दावणगेरे, कर्नाटक, का लाइसेंस भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ससपैंड कर दिया गया था, जिसके चलते बैंक के पास कैपिटल की कमी हो गई थी। नतीजतन, दिन के अंत तक में बैंक का बैंकिंग संचालन समाप्त हो जाएगा। आरबीआई की एक प्रेस रिल़ीज के अनुसार, कर्नाटक में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को भी बैंक को बंद करने और एक लिक्वीडेटर अपॉउंट करने का आदेश जारी करने के लिए कहा गया है। अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं  FREE GK EBook- Download Now. 
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Source: Safalta

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इस लेख के मुख्य बिंदु

1.बैंक के पास कैपिटल और कमाई की कमी है। फलस्वरूप, यह आरबीआई के अनुसार बैंकिंग विनियमन अधिनियम (banking regulation act), 1949 की धारा 11(1) और 22(3)(d) के साथ-साथ एक्ट की धारा 56 का उल्लंघन करता है।
2.रिजर्व बैंक ने बैंक के लाइसेंस को रद्द कर दिया है क्योंकि इसमें पर्याप्त कैपिटल और कमाई की क्षमता की कमी है, RBI के अनुसार, जिसमें यह भी कहा गया है कि बैंक का निरंतर अस्तित्व उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक होगा।
3.RBI के ऑफिशयल बयान के अनुसार, यदि बैंक को परिचालन जारी रखने की अनुमति दी जाती है, तो वह अपने वर्तमान जमाकर्ताओं को पूरा भुगतान करने में असमर्थ होगा, और सार्वजनिक हित को नुकसान करेगा।
4.बैंक की जानकारी के अनुसार, सभी  डिपॉसीटर को जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम (DICGC) से उनकी जमा राशि की पूरी राशि मिल जाएगी। 18 मई, 5.2022 तक, DICGC ने बैंक के  डिपॉसीटर की इच्छा के आधार पर DICGC एक्ट , 1961 की धारा 18A की जरुरतों के तहत कुल बीमित जमा राशि का 10.38 करोड़ पहले ही भुगतान कर दिया था।
 
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DICGC act, 1961 क्या है:

21 अगस्त, 1961 को, जमा बीमा निगम (DIC) विधेयक संसद में पेश किया गया था। संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद, विधेयक को 7 दिसंबर, 1961 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई, और 1961 का जमा बीमा एक्ट 1 जनवरी, 1962 को लागू हुआ। शुरुआत में केवल कामकाजी कॉमर्शियल बैंक ही जमा बीमा योजना द्वारा कवर किए गए थे। भारतीय स्टेट बैंक और उसकी सहायक कंपनियों के साथ-साथ अन्य कॉमर्शियल बैंक और भारत में कार्यरत विदेशी बैंक ब्रांच शामिल थीं।

जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC):

जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम अधिनियम DICGC, 1961 कहता है कि यह जमा बीमा और ऋण गारंटी के उद्देश्य से एक निगम की स्थापना के साथ-साथ उससे जुड़ी या उससे जुड़ी अन्य चीजों का प्रावधान करने वाला एक्ट है।

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