The Politics of Disinformation Report : द पॉलिटिक्स ऑफ डिसइनफॉर्मेशन रिपोर्ट फ्यूचर ऑफ इंडिया फाउंडेशन द्वारा जारी किया है

safalta experts Published by: Chanchal Singh Updated Sat, 07 May 2022 08:22 PM IST

Highlights

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारी मात्रा में प्रोपेगेंडार भारत में युवाओं  और जो सोशल मीडिया यूजर्स हैं उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है।

The Politics of Disinformation Report : द पॉलिटिक्स ऑफ डिसइनफॉर्मेशन रिपोर्ट फ्यूचर ऑफ इंडिया फाउंडेशन द्वारा जारी की गई है, जो एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका हेडऑफिस दिल्ली में है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ऐज में जहां उपयोगकर्ता जुड़ाव को बढ़ावा दिया जा रहा है, दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियां झूठी सूचनाओं को फैलाने और प्रचार में बढ़ोतरी के लिए बहाने के रूप में 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' का उपयोग नहीं कर सकती हैं और न ही करना चाहिए।  अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं  FREE GK EBook- Download Now.

Source: Safalta

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क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारी मात्रा में प्रोपेगेंडार भारत में युवाओं  और जो सोशल मीडिया यूजर्स हैं उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है। प्रोपेगेंडा के इस खतरे से निपटने के लिए कंपनियां भी गंभीर प्रयास नहीं कर रही हैं।

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रिपोर्ट ने सोशल मीडिया की आदतों को कैसे समझा है?

8 राज्यों के युवाओं के साथ उनकी सोशल मीडिया की आदतों और उन पर गलत सूचना और हानिकारक सामग्री के प्रभाव को समझने के उद्देश्य से चर्चा की गई। भारत में 70 फीसदी इंटरनेट यूजर्स 35 साल से कम उम्र के हैं।Science E-book-Download Now

प्रोपेगेंडा के बारे में रिपोर्ट क्या कहती है?

प्रोपेगेंडा, जिसका अर्थ है जानबूझकर गलत सूचना का उपयोग करना, जो कि एक राजनीतिक समस्या है। इसका समाधान केवल सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों और उनके क्रियान्वयन में ही नहीं पाया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रोपेगेंडा फैलाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एम्पलीफिकेशन जुड़ाव से संचालित हो रहा है न कि कंटेंट की क्वालिटी या  सोर्स की  क्रेडिबिलिटी से। यह प्रोपेगेंडा का प्रसार कर रहा है और प्लेटफॉर्म इसे रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं।

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सूचना का प्रमुख स्रोत क्या है?

स्मार्टफोन यूजर्स के लिए, सूचना के प्रमुख सोर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं, जबकि क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारित होने वाले टीवी समाचार एकमात्र अन्य स्रोत हैं जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना में अधिक प्रभावशाली हैं।
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उपभोक्ताओं के बारे में रिपोर्ट क्या कहती है?

अधिकांश सोशल मीडिया यूजर्स  पैसिव कंज्यूमर हैं। हालांकि,  पैसिव कंज्यूमरों ने अपने स्टेज फ़ीड के माध्यम से पैसिव सूचना खपत का प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश यूजर्स व्यक्तिगत पोस्ट और समाचार के बीच अंतर नहीं कर सकते हैं,  क्योंकि देश में डिजिटल साक्षरता कम है और मीडिया की क्रेडिबिलिटी की भी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंटेंट सोर्स इंफॉर्मेशन पाने के तरीके के महत्वपूर्ण चालक हैं। रिपोर्ट में यह भी देखा गया है कि ज्यादातर गलत सूचनाओं को उन नॉरेटिव से जोड़ा जा सकता है जिन्हें व्यापार और राजनीतिक संस्थाओं द्वारा प्रचारित किया गया है।  Polity E-Book-Download Now

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से यह रिपोर्ट क्या कहती है?

इस रिपोर्ट में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से उत्तरदायित्व का अनुरोध  किया है। इस सभी प्लेटफ़ॉर्म को गलत सूचनाओं के विस्तार और प्रसार को रोकना चाहिए। Hindi Vyakaran E-Book-Download Now
 

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