Lumpy Virus : लम्पी वायरस क्या है , जाने इसके लक्षण और इलाज के बारे में जाने विस्तार से

safalta expert Published by: Chanchal Singh Updated Mon, 19 Sep 2022 05:30 PM IST

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 कैपरी पॉक्स वायरस को लम्पी वायरस के नाम से जाना जा रहा है। इसे ढेलेदार त्वचा रोग वायरस भी कहा जा रहा है। यह वायरस पॉक्सविरिडाए डबल स्ट्रैंडेड डीएनए वायरस परिवार से है।

Lumpy Virus : भारत के 12 राज्यों में लम्पी वायरस नामक बीमारी मवेशियों के जान की संकट बनी हुई है। खासकर राजस्थान में इसका कहर मवेशियों के ऊपर भारी पड़ रही है। राज्य में करीब 57000 से भी ऊपर मवेशियों की जान लम्पी के कारण जा चुकी है, साथ ही अभी तक मवेशी के उपर इसका खतरा बढ़ता ही जा रहा है, और हजारों मवेशी इस वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here
 
 

लम्पी वायरस क्या है?


 कैपरी पॉक्स वायरस को लम्पी वायरस के नाम से जाना जा रहा है। इसे ढेलेदार त्वचा रोग वायरस भी कहा जा रहा है। यह वायरस पॉक्सविरिडाए डबल स्ट्रैंडेड डीएनए वायरस परिवार से है।

Source: Safalta

पॉक्सविरिडाए को पॉक्स वायरस भी कहते हैं। इस वायरस के परिवार में वर्तमान 83 प्रजातियां हैं जो 22 पीढ़ी और दो परिवारों में बंटी हुई है। इस परिवार से जुड़ी बीमारियों में चेचक भी शामिल है।

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कैपरी पॉक्स वायरस पॉक्सविरिडाए परिवार के उप-परिवार वायरस के जीनस है। जीनस में 3 प्रजातियां होती है शीपपॉक्स, गोट पॉक्स और लम्पी स्किन डिसज वायरस। 
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 मवेशियों के स्वास्थ्य के लिए विश्व संगठन ने इस बीमारी को नोटिफाइड किया गया है। यह वायरस पशुओं की खाल पर संक्रमण फैला रहे हैं, कैमल पॉक्स, हॉर्स पॉक्स और एविएन पॉक्स के साथ इनका सीरम संबंध नहीं होता है। स्टडी से यह पता चला है कि जिराफ और इंपाला भी लंपी वायरस के लिए बेहद  रेसिप्टिव होते हैं। यह वायरस एशिया और अफ्रीका में पाया जाता है। इस वायरस के लिए कीट पतंगे रोगवाहक के रूप में काम करते हैं, जो इस बीमारी को एक पशु से दूसरे पशु में संक्रमित करते हैं। कैपरी पॉक्स वायरस से मनुष्य संक्रमित नहीं होते है।

लम्पी वायरस के लक्षण क्या हैं 


आमतौर पर इस वायरस के चलते पशुओं के खाल पर गांठें पड़ जाती है। जिसके बाद उनमें पस पड़ जाता है, घाव आखिर में खुजली वाली पपड़ी बनती है जिस पर वायरस महीनों तक बना रहता है। यह वायरस मवेशियों की लार, नाक के स्त्राव और दूध में भी मौजूद हो सकता है। इसके अलावा मवेशियों की लसिका ग्रंथियों में सूजन आना, मवेशियों को बुखार आना, अत्यधिक लार निकलना और आंख आना इस वायरस के अन्य दूसरे लक्षण हैं। सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस ऐप से करें फ्री में प्रिपरेशन - Safalta Application

लम्पी वायरस के इलाज क्या हैं?


वर्तमान में अभी तक इस बीमारी का कोई विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है लेकिन पूर्वी अफ्रीका के देश केन्या में शीप पॉक्स और गोट पॉक्स के लिए बने टीका कैपरी पॉक्स को जानवरों के रोग प्रतिरोधक क्षमता डिवेलप करने के उपाय के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं, कैपरी पॉक्स वायरस सिंगल सीरोटाइप टाइप होता है इसलिए वैक्सीन का असर लंबे समय तक चलता है। पशुओं में बीमारी फैलने पर उन्हें अलग और अन्य मवेशियों से दूर रखने की सलाह दी जाती है ताकि दूसरे जानवरों को संक्रमण से बचाई जा सके। भारत में इस वायरस के लिए पशुओं के गोट पॉक्स वैक्सीन की डोज वर्तमान में दी जा रही है। 

केंद्र सरकार ने लम्पी वायरस के लिए क्या कदम उठाए हैं? 


केंद्र सरकार ने लम्पी वायरस को लेकर सभी 12 राज्यों की मांग के अनुसार गोटट पॉक्स वैक्सीन उपलब्ध करवाई है। पहले राज्य सरकार खुद इसे पूरे खर्च पर खरीद रही थी लेकिन अब केंद्र सरकार राज्य सरकारों को 60 परसेंट खर्च के साथ वैक्सीन प्रोवाइड करवा रही है। जिसमें इस वैक्सीन के लिए केंद्र 60 परसेंट और राज्य सरकार 40 परसेंट खर्च उठा रहे हैं। अभी तक देश के कई राज्यों में लम्पी वायरस के कारण हजारों जानें जा चुकी है। इसके अलावा देश भर में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत अन्य राज्यों में लम्पी वायरस का कहर बढ़ता ही जा रहा है। साथ ही राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार मवेशियों को इस वायरस से बचाने के लिए कई प्रयास कर रहे हैं। 

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