Importance of Empowering Women in India, भारत में महिला सशक्तिकरण का महत्व

Safalta Experts Published by: Kanchan Pathak Updated Thu, 01 Sep 2022 11:36 PM IST

Highlights

भारत जैसे पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ सदियों से लैंगिक आधार पर भेदभाव किए जाते रहे हैं. इस भेदभाव को समाप्त करने के लिए एक महिला के अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ हीं महिला सशक्तिकरण के क्रियान्वयन के लिए लगातार अच्छे प्रयास करने की जरुरत है.

भारतीय संविधान आरम्भ से हीं महिलाओं को समानता का दर्ज़ा प्रदान करता है. भारतीय संविधान राज्य को महिला सशक्तिकरण के लिए सकारात्मक कदम उठाने के अधिकार देता है ताकि एक महिला पुरुष के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर चल सके. भारत में महिलाओं की स्थिति को मज़बूती प्रदान करने के लिए भारतीय संविधान में समय समय पर संशोधन किए जाते रहे हैं. भारत जैसे पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ सदियों से लैंगिक आधार पर भेदभाव किए जाते रहे हैं. इस भेदभाव को समाप्त करने के लिए एक महिला के अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ हीं महिला सशक्तिकरण के क्रियान्वयन के लिए लगातार अच्छे प्रयास करने की जरुरत है. क्योंकि संविधान में अधिकार मिलने के बाद भी एक महिला को आज भी भेदभाव और उत्पीड़न से गुज़रना पड़ता है. अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं  FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here

Source: Safalta.com

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संविधान से मिला है अधिकार

भारतीय संविधान का आर्टिकल 14 (अनुच्छेद 14) ये कहता है कि कानून की दृष्टि में एक महिला और पुरुष के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है. यही नहीं भारतीय संविधान के आर्टिकल 15 (6) के तहत कहा गया है कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अगर हमें किसी प्रकार का पॉजिटिव भेदभाव यानि कोई सकारात्मक पक्षपात करना पड़े तो उसे जस्टीफ़ाइड यानि न्यायोचित माना जाएगा. कहने का मतलब कि हमारे संविधान ने हम महिलाओं के लिए पहले दिन से हीं एक पुख्ता और मजबूत बुनियाद रखी और महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को वर्जित किया. आज भारत की महिलाएँ पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी है. आत्मनिर्भरता की अपनी इस यात्रा में वह ना सिर्फ पुरुष के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर चल पड़ी है बल्कि अब वह पुरुष से आगे भी निकल जाना चाहती है.


महिला सशक्तिकरण में सरकार की भूमिका

महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में भारत सरकार द्वारा बहुत सारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं. इन सपोर्ट्स की बदौलत वह दिन दूर नहीं जब भारतीय समाज में महिलाओं को पुरुषों की भांति हीं प्रत्येक अवसर का लाभ प्राप्त हो सकेगा. जैसे बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं योजना, महिला हेल्पलाइन योजना, उज्जवला योजना इत्यादि अनेक ऐसी योजनाएँ हैं जिससे महिलाएँ अपने हित और अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहने लगी हैं. महिला हेल्पलाइन योजना के तहत महिलाओं को 24 घंटे इमरजेंसी सहायता सेवा प्रदान की जाती है. इस योजना के तहत पूरे देश भर में महिलाएँ अपने विरुद्ध होने वाली किसी भी प्रकार के अपराध या हिंसा की शिकायत 181 नंबर को डायल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं.
आज महिलाओं को सीधे सीधे या छुपे शब्दों में ताने, उलाहने या धमकियाँ देने वाले बच कर नहीं निकल सकते. उसे सम्पत्ति में अधिकार, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी, गर्भपात का अधिकार आदि बहुत से अधिकार मिल चुके हैं और शिक्षा की बदौलत अपने इन अधिकारों के बारे में आज उसे सब कुछ ज्ञात भी है. आज एक महिला के साथ भारत का कानून ना केवल पब्लिक स्पेस बल्कि प्राईवेट स्फीयर में भी घुस कर खड़ा हुआ है. उसे फिजिकली या मेंटली टोर्चेर करने की गलती नहीं की जा सकती.   


महिलाएँ और राष्ट्र निर्माण

महिलाएँ हिन्दुस्तान की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं. यहाँ पर लगभग इसलिए कहा क्योंकि भ्रूणहत्या जैसे कारणों की वजह से आज देश में स्त्री और पुरुष के अनुपात में एक भारी असन्तुलन आ चुका है. परन्तु समय के साथ आज की आधुनिक नारी पढ़-लिख कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र है, अपने अधिकारों के प्रति सजग है और बिना डरे अपराधियों को सबक सिखाने के तरीके सीख गयी है. वह घर, समाज और देश के विकास के काम में खुल कर अपनी भूमिका निभा रही है. कुछ अपवादों को छोड़ कर इस बात को भारतीय समाज भी अब समझने लगा है कि महिलाओं की भूमिका और योगदान को पुरुष की हीं भान्ति केन्द्रीय परिप्रेक्ष्य में रखकर हीं राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को हासिल कर पाना संभव हो सकता है.
 

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भारत में महिला सशक्तिकरण का महत्व

आज मीरा बाई चानू, मैरी कौम, पी वी सिन्धु, गीता फोगाट, अवनि लेखरा जैसी हमारी महिला खिलाड़ियों ने देश को जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने का काम किया है वह महिलाओं को सात परदे के भीतर रख कर कभी संभव नहीं होता.
द्रौपदी मुर्मू, निर्मला सीतारमण, सावित्री जिंदल, फाल्गुनी नायर, रौशनी नादर मल्होत्रा आदि महिलाओं ने भारत के सुनहरे विकास की तस्वीर दुनिया के सामने लाने का काम किया है. क्या बगैर शिक्षा और सपोर्ट के यह संभव हो पाता ?


महिला सशक्तिकरण में बाधाएँ

  • कुछ कट्टर और ऑर्थोडॉक्स विचारधाराओं के लोग आज भी महिलाओं पर पाबंदियां लगाते हैं जिस कारण उन महिलाओं को शिक्षा, रोजगार अआदी के लिए घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं मिलती.
  • उपरोक्त विचारधाराओं के बीच रह कर महिलाएँ खुद भी अपने को पुरुषों से कमतर समझने लगती हैं और अपनी दशा को बदलने में नाकाम हो जातीं हैं.
  • कार्यक्षेत्र में महिला पर होने वाला शोषण महिला सशक्तिकरण की राह में एक बड़ी बाधा है. भारत में अभी भी कार्यस्थलों में महिलाओं के साथ लैंगिग स्तर पर  भेदभाव किया जाता है.
  •  भारत में महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों के मुकाबले कम भुगतान किया जाता है. एक अध्ययन में यह पता चला है कि समान अनुभव और योग्यता के बावजूद भारत में महिलाओं को पुरुषों के अपेक्षा 20 प्रतिशत कम भुगतान दिया जाता है. असंगठित क्षेत्रो में यह समस्या और अधिक है.
  • अशिक्षा और बीच में पढ़ाई छोड़ने जैसी समस्याएँ महिला सशक्तिकरण में बड़ी बाधाएँ हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा है.
  • आज भी भारत में महिला शिक्षा दर 64.6 प्रतिशत जबकि पुरुष की शिक्षा दर 80.9 प्रतिशत है.
  • भारत में आज भी हर वर्ष लगभग 15 लाख लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले कर दी जाती है.
  • आज भी भारतीय महिलाओं के साथ दहेज, हॉनर किलिंग, घरेलू हिंसा, तस्करी जैसे अपराधों का दिखना शर्मिंदगी की बात है.
  • कई स्थानों पर लिंगानुपात में भारी अंतर के बावजूद आज भी कन्या भ्रूण का पता चलने पर माँ की सहमति के बगैर गर्भपात करा दिया जाता है.

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