Jalaluddin Khilji: जलालुद्दीन खिलजी के वंश का इतिहास

Safalta Experts Published by: Blog Safalta Updated Thu, 02 Sep 2021 12:10 PM IST

खिलजी के वंश का इतिहास

खिलजी वंश (1290-1320ई.) 

  • जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (1290-96ई.) ने गुलाम वंश के शाशक को समाप्त कर 13 जुन, 1290 ई. को खिलजी वंश के स्थापना की।
  • खिलजी 64 तुर्क जातियों में से विशेषअधिकार विहीन वर्ग थे जो हेलमंद नदी के  तटिय क्षेत्र तथा लमगान के प्रदेश में रहते थे।
  • मलिक फिरोज या जलालुद्दीन खिलजी के पूर्वज तुर्किस्तान के निवासी थे। 
  • जलालुद्दीन दिल्ली का प्रथम सुल्तान था, जिसने उदार निरंकुशवाद के आदर्श बनाए रखा। इसने किलोखरी को अपनी राजधानी बनाया।
  • जलालुद्दीन का राज्यरोहण मध्यकालीन भारत के इतिहास में एक क्रांति का प्रतीक था। 
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  • जलालुद्दीन के शसंकाल में ही अलाउद्दीन के नेत्रत्व में तुर्को का प्रथम अभियान दक्षिण भारत की और गया था।
  • अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) ने अपने चाचा एंव ससुर जलालुद्दीन खिलजी की कड़ा (इलाहाबाद) में 20 जुलाई, 1296 ई. की हत्या कर सुल्तान बना। इसका बचपन का नाम अली गुरशास्प था।
  • अलाउद्दीन खिलजी का राज्याअभिषेक दिल्ली में बलबन के लाल महल में हुआ।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने सिकंदर व्दितीय (सानी) की उपाधि धारण की।
  • अलाउद्दीन ने विश्व विजय एंव नय़े धर्म की स्थापना का विचार दिल्ली के कोतवाल अलाउल-मुल्क के समझाने पर त्याग दिया था।
  • अलाउद्दीन ने राजा के देवी अधिकार के सिद्धांत को अपना आया था।
  • अलाउद्दीन खिलजी का अधिकार उत्तर भारत में केवल नेपाल, कश्मीर और असम पर नहीं था।
  • अलाउद्दीन में देवगिरी के शशक रामचंद्र को राय रायान की उपाधि प्रदान की।
  • वारंगल विजय (1309-10 ई.)के समय प्रताप रुद्रदेव ने कोहिनूर हीरा मलिक कपूर (अलाउद्दीन के सेनापति) को दिया था। 
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