Sovereign Green Bonds, सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड को मिली मंजूरी, जाने इसके बारे में विस्तार से

safalta expert Published by: Chanchal Singh Updated Thu, 10 Nov 2022 02:33 PM IST

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सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड ऐसे फाइनैंशियल इंस्ट्रूमेंट्स है जो एनवायरमेंटल रूप से टिकाउ और  क्लाइमेट सूटेबल प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट के लिए धन इकट्ठा करते हैं।

Sovereign Green Bonds : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के पहले सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क को अप्रूवल दे दिया है। इस मंजूरी के साथ पेरिस समझौते के लक्ष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूती मिलेगी, जिससे ग्रीन प्रोजेक्ट में ग्लोबल और डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने में सहायता मिलेगी। सॉवरने ग्रीन बॉन्ड जारी कर जुटाए जाने वाले राशि को सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट किया जाएगा जो अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेंसिटी को कम करने में सहायता करेगी। अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here
                   

जानें क्या है ग्रीन बॉन्ड योजना, जिसका बजट में रखा गया है प्रस्ताव


ग्रीन बॉन्ड के फ्रेमवर्क के बारे में


 केंद्र सरकार ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से 16000 करोड़ रुपए जुटा सकती है और इस  फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही यानी मई-जून के महिने में ग्रीन बांड जारी भी किया जा सकता है। ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ध्यान में रखते हुए इस बॉन्ड की अवधि लंबी हो सकती है, वित्त मंत्रालय के अनुसार यह फ्रेमवर्क 2021 में ग्लासगो में cop26 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पंचामृत के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है। साल 2022 - 2023 के लिए बजट बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण  ने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी कर ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए रिसोर्सेज एकत्र करने की बात कही थी। सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस ऐप से करें फ्री में प्रिपरेशन - Safalta Application

ग्रीन बॉन्ड के बारे में


सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड ऐसे फाइनैंशियल इंस्ट्रूमेंट्स है जो एनवायरमेंटल रूप से टिकाउ और  क्लाइमेट सूटेबल प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट के लिए धन इकट्ठा करते हैं।

Source: safalta

सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड नियमित बॉन्ड की तुलना में पूंजी की अपेक्षाकृत लागत को कम करती है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत का पहला सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड तैयार किया गया है और इसके ढांचे के प्रावधानों के मुताबिक ग्रीन बॉन्ड जारी करने पर महत्वपूर्ण फैसले को मान्य करने के लिए ग्रीन फाइनेंस वर्किंग कमेटी (GFWC) का गठन किया गया था। नॉर्वे की सिसरो को भारत के ग्रीन बॉन्ड के ढांचे का इवैल्यूएशन करने के लिए सिलेक्ट किया गया था।

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