What is the Great Resignation: 2021 का ग्रेट रेसिग्नेशन क्या है और ऐसा क्यों हुआ, कारण और परिणाम

Safalta Experts Published by: Nikesh Kumar Updated Fri, 11 Feb 2022 11:27 PM IST

2021 का ग्रेट रेसिग्नेशन - 2021 के मार्च और अप्रैल महीने के बीच, COVID-19 महामारी की वजह से अमेरिका में रिकॉर्ड, 13.0 से 9.3 मिलियन कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई. इनमें से ज्यादातर सर्विस या सेवा, चाइल्ड कैअर क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा संचालित थे. यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं  FREE GK EBook- Download Now.
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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि COVID-19 नाम की यह विकट महामारी अलग अलग वेरिएन्ट्स के साथ लगातार कई फेज में आता रहा और इस वजह से एम्प्लोय द्वारा रेसिग्नेशन दिया जाता रहा. ख़ास कर संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश में उच्च बेरोजगारी दर और लेबर शोर्टेज (श्रम की कमी) के बावजूद कर्मचारियों ने स्वेच्छा से अपनी नौकरी छोड़ दी. इस घटना ने अर्थ सम्बन्धित संकट आर्थिक तंगी या कहें कि आर्थिक विपन्नता की प्रवृति को जन्म दिया जिसे ग्रेट रेसिग्नेशन या सामूहिक इस्तीफ़ा के रूप में वर्णित किया गया है.

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क्या है ग्रेट रेजिगनेशन –


ग्रेट रेजिगनेशन या सामूहिक इस्तीफा एक अर्थ सम्बंधित (इकनोमिक) प्रवृत्ति (ट्रेंड) है जिसमें कर्मचारी सामूहिक रूप से, स्वेच्छा से अपनी नौकरी से इस्तीफा दे देते हैं. साल 2021 की शुरुआत में यह ट्रेंड अमेरिका में देखने को मिला.

Source: social media

इसके प्रमुख कारणों में संभवतः बढ़ते हुए जीवनयापन खर्चे के बीच स्थिर वेतन (जिसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही), दीर्घकाल तक अपनी नौकरी से असंतुष्टि और कोरोना महामारी से बचाव को लेकर चिंता शामिल हैं.
ग्रेट रेजिगनेशन शब्द एंथनी क्लोत्ज़ द्वारा गढ़ा गया था. नौकरी छोड़ने की बढ़ी हुयी दर, कर्मचारियों में उच्च वेतन वाली नौकरी पाने की क्षमता के विश्वास को दर्शाती है. यह आम तौर पर उच्च आर्थिक स्थिरता, काम करने वाले लोगों की बहुतायत और कम बेरोजगारी दर के साथ मेल खाती है.

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इसके विपरीत, बढ़ी हुयी बेरोजगारी की अवधि के दौरान, इस्तीफे की दरों में कमी आती है क्योंकि हायरिंग दरों में भी कमी आती है.  लेकिन यह एक विरोधाभास है कि कोरोना के कारण हायरिंग दरों में कमी आई है, बेरोज़गारी दर बढ़ी है लेकिन इस सबके बावजूद भी इस्तीफे के दरें भी बढ़ गयी हैं. ऐसा कह सकते हैं कि कोरोना महामारी ने कर्मचारियों को अपने करियर, काम करने की स्थिति और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है.

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भारत में सामूहिक इस्तीफे –


भारत में भी अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सामूहिक इस्तीफे की घटना देखी गयी. साल 2021 में विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक लाख से अधिक इस्तीफे के साथ बड़े पैमाने पर गिरावट देखी गई. हालाँकि भारत की स्थिति अमेरिका की तरह गंभीर नहीं है, लेकिन फ़िर भी यह चिंता का विषय तो ज़रूर है क्यूंकि टीसीएस, विप्रो और इंफोसिस जैसी शीर्ष आईटी कंपनियों ने पिछली तिमाही में लगभग 20-25% की उच्च एट्रीशन दर देखी है. ग्रेट रेजिगनेशन के बाद शीर्ष आईटी कंपनियों ने 2021 में लगभग 1.7 लाख लोगों को काम पर रखा है. अमेज़न इंडिया द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 51% लोग उन कंपनियों में नौकरी के लिए अवसर तलाश रहे हैं जिनसे सम्बंधित बहुत कम अनुभव उनके पास है या कहें कि कोई अनुभव हीं नहीं है.

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ग्रेट रेजिगनेशन की शुरुआत –


ग्रेट रेजिगनेशन तब शुरू हुआ जब अमेरिकी प्रशासन ने COVID-19 महामारी के प्रतिक्रिया स्वरुप एम्प्लोयी बेनेफिट्स प्रदान करने से इनकार कर दिया. बर्नआउट, ऑफिस से वर्क फ्रॉम होम कल्चर का शिफ्ट, अधिक उपयुक्त नौकरी में जाने की इच्छा और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर पुनर्विचार ने आग में घी का काम किया और लोगों ने नौकरी छोड़नी शुरू कर दी. 
ग्रेट रेजिगनेशन के साथ हीं स्ट्राइक वेव के रूप में जानी जाने वाली एक हड़ताल भी शुरू हो गई, जिसे कई अर्थशास्त्री खराब कामकाजी परिस्थितियों और कम वेतन के खिलाफ हड़ताल कर्मचारियों की हड़ताल के रूप में वर्णित करते हैं.

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