लॉरेंस कोल्हबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत Lawrence Kohlberg's Theory of Moral Development

Safalta Experts Published by: Anonymous User Updated Sat, 11 Sep 2021 03:26 PM IST

लॉरेंस कोल्हबर्ग ( 25 अक्टूबर, 1927 - 19 जनवरी, 1987) एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे इन्हें नैतिक विकास के चरणों के अपने सिद्धांत के लिए जाना जाता है। उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षा के ग्रेजुएट स्कूल में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लॉरेंस कोहलबर्ग ने 1970 में नैतिक विकास ( theory of moral development) सिद्धांत का विकास किया। यह सिद्धांत पियाजे और जॉन डेवी के विचारों पर आधारित था। उन्होंने नैतिक विकास सिद्धांत को तीन अवस्थाओं में बांटा है। साथ ही अगर आप भी इस पात्रता परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं और इसमें सफल होकर शिक्षक बनने के अपने सपने को साकार करना चाहते हैं, तो आपको तुरंत इसकी बेहतर तैयारी के लिए सफलता द्वारा चलाए जा रहे CTET टीचिंग चैंपियन बैच- Join Now से जुड़ जाना चाहिए।

1) पूर्व - परंपरागत अवस्था ( Pre- conventional stage ) 
2) परंपरागत अवस्था ( Conventional Stage) 
3) पश्यः परंपरागत अवस्था ( Post conventional stage ) 
 
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कोल्हबर्ग के इन तीन स्तरों पूर्व पारंपरिक, पारंपरिक और बाद पारंपरिक को आमतौर पर छह चरणों में बांटा जा सकता है।

प्रथम स्तर या अवस्था ( पूर्व परंपरागत )

1) आज्ञाकारिता और उन्मुखीकरण ( सजा से कैसे बच सकते हैं?)
2) स्वार्थ उन्मुखीकरण ( मेरे लिए इसमें क्या लाभ हैं?)

 दृितीय स्तर या अवस्था ( परंपरागत) 

3) पारस्परिक समझौते ( सामाजिक मानदंडों के अनुरुप बच्चो का रवैया ) 
4) प्राधिकरण और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी उन्मुखीकरण ( कानून एवं व्यवस्था संबंधी नैतिकता ) 

तृतीय स्तर या अवस्था ( पश्यः परंपरागत )
 

5) सामाजिक अनुबंध उन्मुखीकरण 
6) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत ( सैद्विांतिक विवेक)
 

Source: Educational Technology

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