Difference Between Moderates and Extremists: नरम दल और गरम दल क्या है? डालें इतिहास के पन्नों पर एक नजर

Safalta Experts Published by: Nikesh Kumar Updated Wed, 02 Feb 2022 12:15 PM IST

भारत में अंग्रेजी शासन से मुक्ति के लिए औपनिवेशिक काल में हर वर्ग, हर विचारधारा को मानने वालों का योगदान रहा है. लेकिन आधुनिक भारत के इतिहास में मुख्य रूप से दो विचारधारा वाले लोगों के द्वारा हीं देश की आजादी के लिए प्रयास किये जाने की बात की जाती है. इसमें एक विचारधारा को मानने वाले वे हैं जो अंग्रेजी शासन के अंदर ही रहकर सुधारवादी सोच रखने वाले नरमदल के लोग थे, और दूसरी विचारधारा को मानने वाले वे लोग थे, जिनकी सोच यह थी कि बिना अंग्रेजी सत्ता को जड़ से उखाड़े देश के लोगों का कल्याण नहीं हो सकता है. यूँ कहें कि एक दल आजादी के लिए प्रयास में नरम रुख अपना रहे थे और दूसरे आजादी के लिए उग्र सोच रखने वाले थे, जो पूरी तरह अंग्रेजों से मुक्ति के लिए उग्र रुख अपनाने के पक्षधर थे. यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं  FREE GK EBook- Download Now.

आजादी के लिए पहली बार विस्तृत पैमाने पर एकजुट होकर अंग्रेजी सत्ता के विरोध का प्रयास कांग्रेस संगठन के अंतर्गत किया गया. वैसे प्रारंभ में इसका प्रतिनिधित्व कुछ खास प्रबुद्ध वर्गों तक ही सीमित था, लेकिन कालांतर में इसने अपने आधार को विकसित करते हुए पूरे देश की जनता को आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ एकजुट कर अंग्रेजी सत्ता विरोधी आन्दोलन का प्रतिनिधित्व किया.

Source: social media

आगे चलकर कांग्रेस में ही नरमपंथी और गरमपंथी विचारधाराएँ उभरकर सामने आयी.

कर्जन के बंगाल विभाजन के धृष्टतापूर्ण कार्य के बाद कोंग्रेस में नरम दल और गरम दल के बीच मतभेद स्पष्ट तौर पर उभर कर सामने आये. बंगाल विभाजन के विरोधस्वरूप ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का कार्यक्रम रखा गया. नरम दल विचारधारा वाले लोग जहाँ ब्रिटिश विरोधी इन कार्यक्रमों को बंगाल तक ही सीमित रखना चाहते थे, वहीँ कांग्रेस के अंदर दूसरा धड़ा जो गरमदल वालों का था, जो बहिष्कार कार्यक्रम को पूरे देश में लागू करना चाहते थे.

Free Demo Classes

Register here for Free Demo Classes

Please fill the name
Please enter only 10 digit mobile number
Please select course
Please fill the email
आगे यही मतभेद बढ़ते गये और 1907 के कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन दो अलग अलग दलों नरम दल और गरम दल में हो गया.   

 सभी सरकारी परीक्षाओं के लिए हिस्ट्री ई बुक- Download Now

इस प्रकार कांग्रेस के सूरत अधिवेशन 1907 में कांग्रेस के दो खेमों में विभाजन के कारण विचारधाराओं का स्पष्ट बँटवारा हुआ. नरम दल में शामिल मुख्य व्यक्तियों का नाम  - मोतीलाल नेहरु, दादाभाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले, फ़िरोजशाह मेहता, बदरुद्दीन तैय्यबजी, एस.एन. बनर्जी गरम दल में शामिल मुख्य व्यक्तियों का नाम – लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चन्द्र पाल, अरविन्द घोष. नरम दल एवं गरम दल के विचारधाराओं को मानने वालों की सोच को हम निम्न बिन्दुओं के आधार पर अच्छे से समझ सकते हैं.

जानें एक्सिस और सेंट्रल पॉवर्स क्या है व इनमें क्या अंतर हैं

नरम दल -

* उच्च शिक्षित, बुद्धिजीवी लोग 
* संकीर्ण सामाजिक आधार.
* बुद्धिजीवियों और मिडिल क्लास का समर्थन.
* प्रशासन में अधिक से अधिक भारतीयों को शामिल किया जाए.
* भारत में ब्रिटिश शासन के विरोधी नहीं थे और इस का अंत नहीं करना चाहते थे
* कानून के दायरे में रहकर विरोध (अपील, याचिका भेजकर, प्रार्थना, अनुनय) / शांतिपूर्ण आन्दोलन / काम करने का तरीका बहिष्कार, सविनय अवज्ञा 
* सुलह और सहयोग की नीति
* पश्चिमी दार्शनिकों की विचारधारा से प्रभावित
* स्वशासन

जानें प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास के बीच क्या है अंतर

गरम दल -

* शहरी मध्यम वर्गीय लोग 
* व्यापक सामाजिक आधार
* निचला मध्यम वर्ग, श्रमिक, किसान समेत सभी वर्गों का समर्थन  
* ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी और इसका अंत करना चाहते थे
* जन आन्दोलन को बढ़ावा
* उग्र और आक्रामक तरीके से विरोध / क्रन्तिकारी आन्दोलन / विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, हत्या, लूट, पथराव, ...
* स्वराज / पूर्ण स्वतंत्रता

Free E Books