International Sign Language Day 2022, अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस क्यों मनाया जाता है

safalta expert Published by: Chanchal Singh Updated Fri, 23 Sep 2022 11:09 AM IST

Highlights

संयुक्त राष्ट्र ने 23 सितंबर 2018 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय संकेतिक भाषा दिवस मनाने की घोषणा की थी। 23 सितंबर 1951 को विश्व फेडरेशन की स्थापना की गई थी। इस के उपलक्ष में हर साल अंतर्राष्ट्रीय साइन लैंग्वेज डे मनाया जाता है।

International Sign Language Day 2022 : हाथों, चेहरे एवं शरीर के हाव भाव से बातचीत करने की भाषा को सांकेतिक भाषा यानी साइन लैंग्वेज कहा जाता है। दूसरी अन्य भाषाओं की तरह संकेतिक भाषा के भी अपने व्याकरण और नियम हैं जिसके तहत सांकेतिक भाषा का उपयोग किया जाता है। सांकेतिक भाषा मूक एवं बधिर व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण भाषा है। इससे ही मूक एवं बधिर लोग एक दूसरे से कम्युनिकेट करते हैं, साथ ही साइन लैंग्वेज मूक एवं बधिर लोगों की मातृभाषा होती है। इसी भाषा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 22 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है।  अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here

इस भाषा की इतिहास 


संयुक्त राष्ट्र ने 23 सितंबर 2018 को  पहली बार अंतरराष्ट्रीय संकेतिक भाषा दिवस मनाने की घोषणा की थी। 23 सितंबर 1951 को विश्व मूक फेडरेशन की स्थापना की गई थी। इस के उपलक्ष्य में हर साल अंतर्राष्ट्रीय साइन लैंग्वेज डे मनाया जाता है।  सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस ऐप से करें फ्री में प्रिपरेशन - Safalta Application
 

अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस की महत्व क्या है 


संकेतिक भाषा का प्रारंभिक प्रमाण पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में प्लेटो की क्रेटीलस में मिला था। इस पर सुकरात ने कहा है कि अगर हमारे पास सुनने और बोलने की शक्ति नहीं होती है और हम एक दूसरे से अपना विचार व्यक्त करना चाहते हैं तो उस स्थिति में हम अपने हाथों, सिर और शरीर के अन्य अंगों द्वारा संकेतों के माध्यम से बातचीत करने की कोशिश करते हैं। 1620 में जुआन पाब्लो बोनेट में मेड्रिड में मूक-बधिर लोगों के संवाद को समर्पित पहली किताब पब्लिश की थी। जिसके बाद 1680 में जोर्ज डालगार्नो ने भी एक और पुस्तक पब्लिश की थी। इसके बाद 1755 में अब्बे डी लिपि ने पेरिस में बधिर बच्चों के लिए पहला विद्यालय की स्थापना की थी। जिसके बाद 19 वीं सदी में अमेरिका और अन्य देशों में भी बधिर बच्चों के लिए ऐसे अनेक स्कूलों की स्थापना धीरे-धीरे होने लगी । 
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अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2022 का थीम क्या है 


23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य संकेतिक भाषा के बारे में जागरूकता फैलाना है। इस साल अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा की थीम "साइन लैंग्वेज यूनाइट अस" रखा गया है। साइन लैंग्वेज का मतलब यह नहीं है कि आप इशारों में बात करने के लिए किसी भी तरह के हावभाव या बॉडी लैंग्वेज का उपयोग करें। हिंदी अंग्रेजी या अन्य किसी भी भाषा की तरह साइन लैंग्वेज की भी अपनी एक व्याकरण, नियम और तरीका है।


अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर


1.अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा के लिए 2022 में क्या थीम रखा गया है?
उत्तर- साइन लैंग्वेज यूनाइट अस।

2.बधिरों के विश्व संघ के अध्यक्ष कौन हैं?
उत्तर- जोसेफ जे. मरे।

3.बधिरों के विश्व संघ स्थापना कब और कहां हुई थी?
उत्तर- 23 सितंबर 1951, रोम, इटली।

4.बधिर मुख्यालय का विश्व संघ स्थान कहां है?
उत्तर- हेलसिंकी, फिनलैंड।

5.बधिर बच्चों के लिए पहला विद्यालय की स्थापना कब और कहां की गई थी?
उत्तर-1755 में अब्बे डी लिपि द्वारा पेरिस में स्थापना की थी।

6.मूक-बधिर लोगों के संवाद को समर्पित पहली किताब कब और किसने पब्लिश की थी?
उत्तर-1620 में जुआन पाब्लो ने ।

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