MGNREGA scheme : मनरेगा में काम करने के दिनों की संख्या में हो सकता है बदलाव

safalta experts Published by: Chanchal Singh Updated Fri, 11 Feb 2022 02:04 PM IST

Highlights

  • समिति ने ऐसे समय में सिफारिशें दीं, जब कोविड -19 महामारी के बीच अपने गांवों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए यह योजना सुरक्षा जाल बन गई है।
  • इसके अलावा, इस योजना के तहत काम की मांग वित्तीय वर्ष 2021-2022 में अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
  • कोराना महामारी के बीच यह रोजगार योजना ग्रामिण लोगों के लिए वरदान साबित हुई है। लोगों को इससे रोजगार और महामारी के बीच पैसे की तंगी से आराम भी मिला है।

MGNREGA scheme : यह केंद्र सरकार के द्वारा चलायी गयी प्रमुख योजनओं में से एक है, इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्र का विकास और वहां के लोगों  को रोजगार प्रदान करना है, इस योजना के जरिए भारत के गांवों को शहर के जैसा सुख-सुविधा प्रदान करना है, जिससे ग्रामीणों का पलायन रुक सके| आपको बता दें कि संसदीय समिति ने हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम के गारंटीकृत दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 करने की सिफारिश की है।
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मनरेगा योजना के मुख्य बिंदु
  • समिति ने ऐसे समय में सिफारिशें दीं, जब कोविड -19 महामारी के बीच अपने गांवों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए यह योजना सुरक्षा जाल बन गई है।
  • इसके अलावा, इस योजना के तहत काम की मांग वित्तीय वर्ष 2021-2022 में अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
  • कोराना महामारी के बीच यह रोजगार योजना ग्रामिण लोगों के लिए वरदान साबित हुई है। लोगों को इससे रोजगार और महामारी के बीच पैसे की तंगी से आराम भी मिला है।
समिति ने केंद्र से क्या क्या सिफारिशें की
  • इसने बजटीय आवंटन को अधिक व्यावहारिक तरीके से करने की सिफारिश की, ताकि मजदूरी और भौतिक हिस्से के भुगतान के लिए धन का प्रवाह विना बाधा के जारी रख सके और किसी भी समय धन की कमी न हो।
  • इस समिति ने मौजूदा प्रावधानों पर भी ध्यान दिया और कहा कि मनरेगा ग्रामीण लोगों के लिए आखिरी ‘फॉल बैक’ विकल्प है। 
  • इसने ग्रामीण विकास विभाग को 100 से 150 दिनों के काम के गारंटीकृत दिनों की वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए योजना की समीक्षा करने की सिफारिश की।
  • इस समिति ने ग्रामीण विकास मंत्रालय को इस योजना के तहत मजदूरी दरों को मुद्रास्फीति के अनुरूप सूचकांक से जोड़कर बढ़ाने के लिए भी कहा है।
  • अभी इस पर सिर्फ बैठक हुई है, मंत्रालय ने समिति की सिफारिशें बस सुनी है, इस पर सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है।
बजट 2022 में फंड आवंटन
वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय बजट 2022-23 में मनरेगा के लिए विनियोजिन में वृद्धि नहीं की है। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए वित्त मंत्रालय ने इसमें  73,000 करोड़ रुपये  बरकरार रखा है
मनरेगा में सुधार की क्या जरूरत है?
बदलते समय और कोविड -19 महामारी के आलोक में उभरती चुनौतियों को देखते हुए समिति ने यह निर्णय लिया है कि मनरेगा योजना को नया रूप देने की आवश्यकता है।इस प्रकार, समिति का विचार है कि इस योजना के कार्यों की प्रकृति में इस तरह से विविधता लाने की आवश्यकता है कि गारंटीकृत कार्य दिवसों की संख्या को कम से कम 150 दिनों तक बढ़ाया जा सके, ताकि लोगों को और अधिक दिनों के लिए रोजगार मिल सके।
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