National Mathematics Day 2022, राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है, जानें इसके इतिहास और महत्व के बारे में

safalta expert Published by: Chanchal Singh Updated Wed, 21 Dec 2022 07:29 PM IST

Highlights

साल 2012 को 22 दिसंबर को श्रीनिवास रामानुजन के 125 वें जयंती के अवसर पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इस दिन को चेन्नई में एक समारोह में गणित दिवस के रूप में  मनाने के लिए घोषणा की थी

National Mathematics Day 2022: हर साल 22 दिसंबर को महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के अवसर पर उनके गणित के क्षेत्र में योगदान को याद करने के लिए हर साल राष्ट्रीय स्तर पर गणित दिवस मनाया जाता है। श्रीनिवास रामानुजन भारत के महान गणितज्ञ में से एक हैं, इन्होंने गणित के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं जो आज भी विश्व स्तर पर काम आ रहे हैं, बहुत से साइंटिस्ट के लिए इनके योगदान मददगार साबित हुए हैं। राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर आइए जानते हैं इस दिन को मनाने के इतिहास महत्व के बारे में विस्तार से सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस ऐप से करें फ्री में प्रिपरेशन - Safalta App 

 यह बात हम सभी को पता है कि प्राचीन काल से  भारत के विभिन्न विद्वानों ने गणित के क्षेत्र में अपने योगदान दिए हैं, जैसे कि आर्यभट्ट, ब्रह्मा गुप्ता, महावीर, भास्कर द्वितीय, श्रीनिवास, रामानुजन आदि इन्होंने बहुत कम उम्र में ही गणित के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट प्रतिभा को दर्शाया है। इनके कार्यों के कई उदाहरण ऐसे हैं जिन्हें आज तक सुलझाया नहीं जा सका है। इन्होंने थ्योरम, मैथ्स एनालिसिस, सीरीज आदि लिखे हैं, जो आज भी सुलझाए नहीं जा सके हैं।

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Source: safalta

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राष्ट्रीय गणित दिवस का इतिहास


साल 2012 को 22 दिसंबर को श्रीनिवास रामानुजन के 125 वें जयंती के अवसर पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इस दिन को चेन्नई में एक समारोह में गणित दिवस के रूप में  मनाने के लिए घोषणा की थी कि हर साल 22 दिसंबर को रामानुजन के जन्म दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाएगा। तब से लेकर आज तक हर साल 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है।
 

 राष्ट्रीय गणित दिवस का महत्व क्या है 


राष्ट्रीय गणित दिवस सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच मानवता के विकास के लिए गणित के महत्व के बारे में जन जागरूकता को बढ़ाना है, इस दिन गणित के शिक्षकों एवं छात्रों को वर्कशॉप, शिविर के माध्यम से ट्रेनिंग की ट्रेन किया जाता है और संबंधित क्षेत्रों में गणित एवं रिसर्च के लिए शिक्षण सामग्री के बारे में विस्तार से चर्चा की जाती है।  Free Daily Current Affair Quiz-Attempt Now with exciting prize


 राष्ट्रीय गणित दिवस भारत में कैसे मनाया जाता है 


भारत के विभिन्न स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय एवं शैक्षणिक संस्थानों में गणित दिवस मनाया जाता है। लोग इस दिन समारोह के दौरान अपनी प्रतिभा को दर्शाते हैं। गणित विज्ञान को सीखने समझने के लिए यूनेस्को और भारत की ने एक साथ काम किया हुआ है। इसके अलावा छात्रों को गणित में शिक्षित करने एवं दुनियाभर  छात्रों एवं विद्यार्थियों के लिए ज्ञान फैलाने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय गणित दिवस मनाने के लिए वर्कशॉप द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस इंडिया एनएसआई इलाहाबाद में स्थित सबसे पुरानी साइंस एकेडमी है यहां हर साल नेशनल मैथमेटिक्स डे के अवसर पर एक वर्कशॉप आयोजित की जाती है। गणितदिवस के अवसर पर देशभर के विद्वान यहां आते हैं और गणित एवं श्रीनिवास रामानुजन के गणित के क्षेत्र में योगदान पर चर्चा की जाती है। इसके अलावा वर्कशॉप का विषय, वैदिक काल से लेकर मध्य काल तक कि भारतीय गणितज्ञों के योगदान पर गहन चर्चा के बाद महत्वपूर्ण वार्ता एवं प्रस्तुतियां होती है। भारत के सभी राज्यों में अलग-अलग तरीके से राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक विभिन्न प्रतियोगिताएं एवं गणित को लेकर क्विज आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों एवं कार्यशाला में गणित की प्रतिभा और पूरे भारत के छात्र द्वारा भाग लिया जाता है।
 

 श्रीनिवास रामानुजन के योगदान के बारे में 


श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु में हुआ था। यह ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे, उन्होंने 12 साल की उम्र में ही ट्रिग्नोमेट्री में ज्ञान प्राप्त कर लिया था और बिना किसी सहायता के अपने विचारों को डिवेलप किया था। मात्र 15 साल की उम्र में इन्होंने अप्लाइड मैथ्स में जॉर्ज शोब्रिज कैर के सिनॉप्सिस ऑफ एलीमेंट्री रिजल्ट की एक प्रति हासिल की थी।
 

 गणित के क्षेत्र में श्रीनिवास रामानुजन का योगदान क्या रहा   


श्रीनिवास रामानुजन का बचपन गरीबी में गुजरा वे अपने स्कूल की शिक्षा के लिए अपने दोस्तों से किताब उधार लिया करते थे। श्रीनिवास रामानुजन ने अपने घर की आर्थिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए क्लर्क की नौकरी की साथ ही देर रात तक समय मिलने पर गणित के सवालों को सुलझाया करते थे। एक बार उनके द्वारा लिखे गए पत्र को जब एक अंग्रेज ने देखा तब वे  श्रीनिवास से काफी ज्यादा प्रभावित हुए और उन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के पास रामानुजन को पढ़ने के लिए भेजा। फिर रामानुजन के शोध पत्र 1911 में जनरल ऑफ द इंडियन मैथमेटिकल सोसायटी में पब्लिश हुआ था। उन्होंने बिना किसी की सहायता के लगभग 3900 परिणामों को मुख्य रूप से पहचान कर समीकरणों के साथ संकलित किया था। उनमें से कई परिणाम मूल एवं उपन्यास है।  

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