Dussehra 2022, इन 10 जगहों पर होती है रावण की पुजा, नहीं होता रावण दहन

safalta experts Published by: Chanchal Singh Updated Tue, 04 Oct 2022 06:18 PM IST

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भारतीय संस्कृति में भले ही रावण को एक राक्षस एवं खलनायक के रूप में देखती है, लेकिन भारत में ही कुछ ऐसे स्थान भी है जहां रावण का दहन नहीं बल्कि उनका पूजन किया जाता है।

Dussehra 2022 : नवरात्रि के 9 दिन दुर्गा मां के पूजा अनुष्ठान और पर्व के बाद दसवें दिन यानी दशमी तिथि को विजयदशमी का पर्व पूरे भारत में जोरों शोरों से मनाया जाता है। विजयदशमी जिसे दशहरा का पर्व भी कहा जाता है, इस दिन के परंपरा के मुताबिक हर साल रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इस पर्व को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में भले ही रावण को एक राक्षस एवं खलनायक के रूप में देखती है, लेकिन भारत में ही कुछ ऐसे स्थान भी है जहां रावण का दहन नहीं बल्कि उनका पूजन किया जाता है। आइए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में जहां पर विजयदशमी के दिन रावण का दहन नहीं बल्कि उनका पूजन किया जाता है।  अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here

1. मंदसौर - मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था और यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था, इसलिए इस शहर का नाम मंदसौर पड़ा। मंदसौर रावण का ससुराल था और यहां की बेटी से रावण शादी हुई थी इसलिए यहां के परंपरा के मुताबिक दमाद के सम्मान के चलते रावण के पुतले का दहन के बजाय उसकी पूजा की जाती है। मंदसौर के रूंडी में रावण की मूर्ति बनी हुई है। जिसकी पूजा की जाती है।

2. महाकाल की नगरी उज्जैन - मध्य प्रदेश के उज्जैन में ही एक गांव है जहां रावण का दहन नहीं किया जाता है, बल्कि रावण की पूजा की जाती है। यह उज्जैन जिले का चिखली गांव है यहां पर कहा जाता है कि रावण की पूजा नहीं करने पर पूरा गांव जलकर भस्म हो जाएगा, इस डर से ग्रामीण यहां रावण दहन करने के बजाय उनकी मूर्ति का पूजा करते हैं।

3. अमरावती - महाराष्ट्र में अमरावती में भी रावण को भगवान की तरह ही पूजा जाता है। यहां गढ़चिरौली नामक स्थान पर आदिवासी समुदाय रहते हैं जो रावण के मूर्ति का पूजन करते हैं। आदिवासियों का पर्व फाल्गुन रावण की खास तौर पर पूजा करके मनाया जाता है। यह आदिवासी समुदाय रावण और उसके पुत्र को अपना देवता मानते हैं।

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4. बिसरख - उत्तर प्रदेश के बिसरख नामक गांव में भी रावण का मंदिर बनाया गया है। जहां रावण की पूजा की जाती है और इस गांव का मानना है कि रावण का यह ननिहाल था। बिसरख का नाम पहले विश्वेशरा था जो कि रावण के नाम के पिता पर रखा गया था।

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Source: Safalta

बैजनाथ- 
हिमाचल प्रदेश में स्थित कांगड़ा जिले का यह कस्बा रावण के मूर्ति का पूजा करता है। यहां भी रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है। इस जगह पर रावण ने भगवान शिव की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें मोक्ष का वरदान दिया था। इसलिए शिव भक्त इस क्षेत्र में रावण दहन नहीं करते हैं।

6.  आंध्र प्रदेश- के काकीनाडा नामक क्षेत्र मैं भी रावण का मंदिर बना हुआ है। जहां भगवान शिव के साथ रावण की पूजा की जाती है। काकीनाडा में मछुआरा समुदाय रावण की पूजा अर्चना करते हैं। रावण को लेकर यहां कुछ और भी विशेष मान्यताएं हैं।

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7. जोधपुर- 
राजस्थान के जोधपुर में भी रावण का मंदिर है और उनकी प्रतिमा की स्थापना की गई है। कुछ विशेष समाज के लोग यहां पर रावण की पूजन करते हैं और स्वयं को रावण के वंशज मानते हैं। इस स्थान को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं कुछ लोगों का कहना है कि यह रावण का ससुराल भी है।

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कर्नाटक -
कर्नाटक के मंडला जिले में मालवल्ली तालुका नामक जगह पर रावण का मंदिर बनाया गया है जहां लोग रावण की पूजा करते हैं। कर्नाटक के कोलार में भी शिव भक्त रावण की पूजा करते हैं।

9. दक्षिण भारत में रावण को विशेष रूप से पूजा जाता है। दक्षिण भारत में यह माना जाता है कि रावण परम ज्ञानी, पंडित एवं महान शिव भक्त थे इसलिए दक्षिण भारत के कुछ स्थानों पर उनके इन्हीं विशेष गुणों के कारण उन्हें पूजा जाता है और रावण दहन को वे लोग दुर्गुणों का दहन मानते हैं।

10. उत्तर प्रदेश के जसवंतनगर में भी दशहरे पर रावण की पूजा अर्चना की जाती है। जिसके बाद उसे मारकर टुकड़े टुकड़े किए जाते हैं फिर लोग रावण के टुकड़े को घर ले जाते हैं और 13 दिन रावण की तेरहवीं भी मनाई जाती है।
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