RBI Sovereign Gold Bonds: भारतीय रिजर्व बैंक  ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड  के समय से पहले बॉन्ड तोड़ने  के लिए रिडेम्पशन वैल्यू की घोषणा की है

safalta experts Published by: Chanchal Singh Updated Fri, 11 Feb 2022 04:01 PM IST

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न बांडों का कार्यकाल 8 साल का होता है। लेकिन इस बांड में उपभोगता के पास ये आजादी रहती है कि वो बांड के 5 साल पूरे होने के बाद उसे तोड़ सकता है। 

RBI Sovereign Gold Bonds:रिडेम्पशन वैल्यू वह राशि है जो जारीकर्ता को किसी प्रकार की सुरक्षा को वापस करने के लिए भुगतान करना होगा, इससे पहले कि सुरक्षा प्रौढ़ता की तारीख तक पहुंच जाए। विचार यह निर्धारित करने के लिए है कि किस प्रकार जारीकर्ता इस प्रकार के लेनदेन को करने की अनुमति देगा और या तो नुकसान को कम करेगा या फिर भी लेनदेन से किसी प्रकार का लाभ प्राप्त करेगा। बॉन्ड इश्यू निवेश का एक सामान्य उदाहरण है जिसे प्रौढ़ता तिथि से कुछ समय पहले भुनाया जा सकता है।
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2022 में रिडेम्पशन वैल्यू क्या रका गया है?

रिडेम्पशन मूल्य 4,813 रुपये प्रति यूनिट था। यह 2,600 रुपये के इश्यू प्राइस से लगभग 85% प्रीमियम है, जो जनवरी 2016 में तय किया गया था। रिडेम्पशन मूल्य 31 जनवरी- 04 फरवरी, 2022 के लिए सोने की बंद कीमत के साधारण औसत के आधार पर इसे निर्धारित किया गया था।

Source: social media

गोल्ड बॉन्ड स्कीम नवंबर 2015 में शुरू की गई थी। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की पहली किश्त नवंबर, 2015 में खरीदने के लिए उपलब्ध थी।
 

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना क्या हैं?


सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना नवंबर 2015 में भौतिक सोने की मांग को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। यह योजना घरेलू बचत के एक हिस्से को वित्तीय बचत में ट्रांसफर करने का भी प्रयास करती है, जिसका उपयोग सोने की खरीद के लिए किया जाता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना सरकारी प्रतिभूतियां हैं, जो सोने के ग्राम में अंकित होती हैं। इसमें इन्वेस्टर्स को निर्गम मूल्य का भुगतान नकद में करना होता है और बांड प्रौढ़ता के बाद नकद में भुनाए जाते हैं।

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यह बांड भारत सरकार की ओर से RBI द्वारा जारी किया जाता है। सरकार की अधिसूचना के अनुसार, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करने की तारीख से 5वें साल के बाद, जिस तारीख को ब्याज देना होता है, उसी तारिख के अनुसार मोचन की अनुमति दी जा सकती है। आपको बता दें कि जनवरी 2016 में, सरकार ने सरकार की स्वर्ण बांड योजना की दूसरी किश्त जारी की थी।
 

SGB का कार्यकाल क्या है

इन बांडों का कार्यकाल 8 साल का होता है। लेकिन इस बांड में उपभोगता के पास ये आजादी रहती है कि वो बांड के 5 साल पूरे होने के बाद उसे तोड़ सकता है। 
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