Srinivasa Ramanujan Biography, श्रीनिवास रामानुजन इयंगर के जीवन परिचय के बारे में जानें विस्तार से

Safalta experts Published by: Chanchal Singh Updated Wed, 21 Dec 2022 03:42 PM IST

Highlights

इन्होंने अपने 33 साल के जीवन में 3884 इक्वेशन बनाए थे। जिसमें से कई सारे इक्वेशन आज भी सॉल्व नहीं हुआ है। गणित में 1729 नंबर को रामानुजन नंबर से जाना जाता है।

Srinivasa Ramanujan Biography: गणित एक ऐसा विषय है जो सभी के पल्ले नहीं पड़ता है, बहुत से लोगों के लिए यह टेढ़ी खीर है, तो वही किसी के लिए बाएं हाथ का खेल होता है। बहुत से लोगों को गणित समझ नहीं आता है जिसके कारण लोग गणित के क्षेत्र में कैरियर बनाना पसंद नहीं करते हैं, लेकिन गणित के क्षेत्र में भारत का परचम लहराने वाले एक ऐसे शख्सियत जिसे लोग श्रीनिवास अय्यंगर रामानुजन के नाम से जानते हैं, इनके जन्म दिवस के अवसर पर ही भारत में गणित दिवस मनाया जाता है। भले ही लोगों को गणित पसंद ना हो लेकिन गणित के नाम पर रामानुजन का नाम सम्मान से लिया जाता है। रामानुज भारत के सबसे बड़े गणितज्ञ में से एक हैं। इन्होंने बहुत कम उम्र में ही गणित के कुछ ऐसे थियोरम और फार्मूला बनाए थे, जिसे सुलझाना आज तक बड़े से बड़े गणितज्ञ के बस की बात नहीं है।

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Source: safalta

मध्यमवर्गीय परिवार से होते हुए भी रामानुजन अपने ज्ञान और क्षमता के बल से विदेश जाकर गणित के क्षेत्र में और अध्ययन, रिसर्च किया और भारत का नाम रोशन किया है, आइए जानते हैं इनके जीवन परिचय के बारे में विस्तार से-   अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf Download here सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस  ऐप से करें फ्री में प्रिपरेशन - Safalta App 


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 रामानुजन का जन्म और परिवार

     
 श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु राज्य के कोयंबतूर जिले के  इरोड नामक गांव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम श्रीनिवास इयंगर था। जो कपड़े की दुकान में मुनीम का कार्य करते थे और इनकी माता का नाम कोमल तम्मल था। जो एक गृहणी थी। इनका विवाह 22 साल में  जानकी से हुआ था जो इनसे 10 साल छोटी थीं।
 
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 रामानुजन की शिक्षा


रामानुजन की बुद्धि बचपन से तेज नहीं थी  बचपन में इन्होंने बहुत कठिनाइयों का सामना किया है। 3 साल के उम्र तक यह बोलने में असमर्थ थे। जिसके बाद 5 साल की उम्र में रामानुजन की  भर्ती कुंभकोणम के प्राथमिक विद्यालय में की गई। रामानुजन को सिर्फ गणित विषय में बहुत अत्यधिक रूचि थी। वह दूसरे विषयों को उतनी गंभीरता से नहीं पढ़ते थे, जितना कि वह गणित को पढ़ते थे। प्राइमरी परीक्षा में उन्होंने पूरे जिले में अधिक अंक मिले थे। इनका व्यक्तित्व बहुत सरल और शांत था। रामानुजन गणित में इतने तेज है कि उन्होंने स्कूल के समय में कॉलेज स्तर  की गणित की पढ़ाई कर ली थी। 13 साल के उम्र में रामानुजन ने एस.एल. लोनी द्वारा लिखित पुस्तक एडवांस ट्रिग्नोमेट्री के मास्टर बन गए थे। और उन्होंने बहुत सारी थेवरम की रचना की थी। 17 साल की उम्र में उन्होंने बर्नोली नंबरों की जांच की और दशमलव के 15 अंक तक के एलुयेर  कांस्टेंट की वैल्यू सर्च की थी।

 स्कूल परीक्षा के दौरान इन्हें गणित और अंग्रेजी विषय में अच्छा अंक लाने के लिए स्कॉलरशिप दी गई थी। श्रीनिवास ने गणित विषय में ज्यादा रुचि होने के कारण बाकी विषय पढ़ना छोड़ दिया था। ये दूसरे विषयों की क्लास में भी गणित पढ़ते थे जिसके कारण ये 11वीं में गणित को छोड़कर सभी विषयों में फेल हो गए थे। 1960 में इन्होंने 12वीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा दी जिसमें भी वे फिर से फेल हो गए थे और उन्होंने फेल होने के बाद प्रारंभिक शिक्षा की पढ़ाई छोड़ दी थी।

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 रामानुजन का गणित के क्षेत्र में क्या योगदान रहा है


 साल 1918 में एक 30 साल की उम्र में गणित के 120 फार्मूला लिखे थे और अपनी सर्च को अंग्रेजी प्रोफेसर जी. एच. हार्डी के पास भेजा था । हार्डी ने उनके रिसर्च को पढ़ा और वो उनके सर्च से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने रामानुजन को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी आने के लिए कहा। अक्टूबर 1918 में रामानुजन को ट्रिनिटी कॉलेज की मेंबरशिप मिली और इस मुकाम तक पहुंचने वाले उस दौर में वे पहले भारतीय नागरिक थे।
 

 रामानुजन की मृत्यु


 26 अप्रैल 1920 को टी.बी के बीमारी के चलते रामानुजन की मृत्यु हुई थी। मृत्यु के समय उनकी आयु केवल 33 साल की थी और इनकी मृत्यु से पूरा विश्व शोक में था। इन्होंने अपने 33 साल के जीवन में 3884 इक्वेशन बनाए थे। जिसमें से कई सारे इक्वेशन आज भी सॉल्व नहीं हुआ है। गणित में 1729 नंबर को रामानुजन नंबर से जाना जाता है। तमिलनाडु में रामानुजन के जन्मदिन को आईटी दिवस के रूप में मनाया जाता है और भारत में नेशनल मैथमेटिक्स डे के रूप में मनाया जाता है। श्रीनिवास रामानुजन को मैन हू न्यू इनफिनिटी कहा जाता है। इनके जीवन के ऊपर तमिल फिल्म रामानुजन का जीवन बनाया गया था और 2015 में इन पर एक और फिल्म बनी जिसका नाम द मैन हू न्यू इनफिनिटी  रखा गया था।

 श्रीनिवासन रामानुजन से जुड़े 10 बातें 


1.महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 18 सो 87 कोयंबटूर के ईरोड गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम कोमलताम्मल एवं पिता का नाम श्रीनिवासा अय्यंगर था। रामानुजन के जन्म के बाद इनका पूरा परिवार कुंबकोनम में जाकर बस गए। जहां इनके पिता कपड़े की दुकान में काम करते थे।

2. शुरुआत में रामानुजन सामान्य बच्चों की तरह थे, यहां तक कि यह 3 साल की उम्र उन्होंने बोलना शुरू भी नहीं किया था। स्कूल में भर्ती लेने के बाद पढ़ने - पड़ाने  का घिसा पिटा अंदाज उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा, इसके अलावा इन्होंने प्राइमरी एग्जाम में पूरे जिले में टॉप किया था। 15 साल की उम्र में "ए सिनॉपसिस ऑफ एलिमेंट्री रिजल्ट्स इन प्योर एंड एप्लाइट मैथमेटिक्स की बहुत पुरानी किताब को पूरी तरह पढ़ लिए थे, जिस किताब में हजारों थियोरम थे। इनकी प्रतिभा का ही फल था कि इन्होंने आगे अपने पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप भी मिली, जिससे इन्हें आगे पढ़ने का अवसर मिला। 


3.रामानुजन का दिमाग केवल गणित में लगा था, इन्हें दूसरे विषयों कि और बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जिसके कारण उन्होंने पहले गवर्नमेंट कॉलेज और बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास की स्कॉलरशिप खोनी पड़ी थी। इन सब के बावजूद भी गणित के प्रति इनका लगाव कम नहीं हुआ। साल 1911 में इंडियन मैथमेटिकल सोसायटी के जनरल में इनका 17 पन्नों का एक पेपर पब्लिश हुआ था, 1912 में रामानुजन मद्रास पोर्ट में क्लर्क की नौकरी मिली जिसके बाद से इनकी पहचान एक मेधावी गणितज्ञ के रूप में सामने आई।

4. रामानुजन उस दौर के विश्व प्रसिद्ध ब्रिटिश गणितज्ञ जीएच हार्डी के काम के बारे में जानने की रूचि रखते थे। 1913 में रामानुजन ने अपने कुछ काम पत्र के माध्यम से हार्डी के पास भेजे थे। शुरुआत में हार्डी ने उनके खातों को काम का न समझते हुए ध्यान नहीं दिए थे, लेकिन जल्द ही उन्होंने उनकी रामानुजन की प्रतिभा को पहचान लिए जिसके बाद हार्डी ने रामानुजन को पहले मद्रास यूनिवर्सिटी और बाद में कैंब्रिज में स्कॉलरशिप दिलाने में सहायता की थी। हार्डी ने रामानुजन को आपने पास कैंब्रिज बुला लिया था। हार्डी के सानिध्य में रामानुजन ने खुद के 20 रिसर्च पेपर पब्लिश करवाए, 1916 में रामानुजन को कैंब्रिज से बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री मिली और 1918 में रामानुजन रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन के मेंबर बन गए।

5. जब ये भारत लौटे तब भारत की गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, इस समय किसी भारतीय को रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन में मेंबर बहुत बड़ी बात थी। रॉयल सोसाइटी के पूरे इतिहास में रामानुजन का आयु का कोई व्यक्ति सदस्य के रूप में सदस्यता ग्रहण नहीं की थी और ना ही आज तक किसी ने किया है। रॉयल सोसाइटी की मेंबर बनने के बाद भी कॉलेज की फेलोशिप पाने वाले पहले व्यक्ति थे।

6. रामानुजन कड़ी मेहनत करने वाले व्यक्ति में से एक थे। ब्रिटेन का ठंडा मौसम उन्हें सूट नहीं कर रहा था जिसके बाद 1917 में इन्हें टीबी की बीमारी हुई थी। स्वास्थ्य में थोड़े बहुत सुधार के बाद 1919 में इनकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई जिसके कारण यह भारत लौट आए। 26 अप्रैल 1920 के 32 साल की आयु में इनका देहांत हो गया। बीमारी की हालत में भी इन्होंने गणित से अपना नाता नहीं तोड़ा था। यह बिस्तर पर लेटे वक्त भी थियोरम लिखा करते थे। जब कोई उनसे रेस्ट के बजाये थ्योरम लिकने का कारण पूछा जाता था कि आप आराम के बजाय थ्योरम क्यों लिख रहे हैं तब वे कहा करते थे कि थियोरम सपने में आए थे।

7. रामानुजन के बनाए गए ढेर सारे ऐसे थियोरम है जो आज भी किसी पहेली से कम नहीं है। आज तक इनके द्वारा लिखे गए थियोरम को बड़े से बड़े गणितज्ञ भी नहीं सुलझा पाए हैं। उनका एक पुराना रजिस्टर 1976 कॉलेज की लाइब्रेरी में मिला था जिसमें कई फार्मूले थे। इस रजिस्टर में लिखे हुए थियोरम आज तक नहीं सुलझाया नहीं जा सका है। इस रजिस्टर को रामानुजन की नोटबुक के नाम से जाना जाता है। 

8.रामानुजन ईश्वर के ऊपर अपार विश्वास एवं श्रद्धा रखते थे, जब उनसे गणित के फार्मूले के बारे में पूछा जाता तो वह कहते इष्ट की देवी नामगिरी देवी की कृपा से उन्हें यह फार्मूला आते थे, रामानुजन का कहना था कि मेरे लिए गणित के फार्मूले का कोई अर्थ नहीं जिससे मुझे आध्यात्मिक विचार ना मिलते हो।

9. रामानुजन की बायोग्राफी द मैन हू न्यू इंफिनिटी 1991 में पब्लिश हुई थी। इसी नाम से रामानुजन पर एक फिल्म भी बनी है। इस फिल्म में एक्टर देव पटेल ने रामानुजन का रोल प्ले किया था।

10. रामानुजन आज भी ना सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी गणितज्ञों के लिए इंस्पिरेशनल है।
 
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