Weekly Current Affair, 1  से 13 November तक के करंट अफेयर यहां पढ़े

safalta expert Published by: Chanchal Singh Updated Sun, 13 Nov 2022 05:20 PM IST

Weekly current affair: अगर आप भी किसी प्रकार के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए यह लेख बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसमें हम आज आपके लिए लाए हैं राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर के करंट अफेयर। जो कि आपके प्रतियोगी परीक्षा के लिए लाभदायक हो सकता है। इस लेख का एक मात्र उद्देश्य यह है कि इस लेख से ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे छात्रों की सहायता करना है। वीकली करंट अफेयर के विषय में पढ़ने के लिए नीचे स्क्रोल कीजिए।  अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here
 
1 November 2022
 

Special Campaign 2.0, क्या है विशेष अभियान 2.0 जाने इसके बारे में विस्तार से

 
Special Campaign 2.0 : प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग डिएआरपीजी ने साल 2021 में आयोजित विशेष अभियान की तर्ज पर 2 अक्टूबर 2022 से 31 अक्टूबर 2022 तक सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता एवं पेंडिंग केस के निपटान के लिए विशेष अभियान 2.0 चलाया था। विशेष अभियान 2.0 ने भारत सरकार के सभी मंत्रालयों एवं विभागों और उनके संबंध अधीनस्थ कार्यालयों को कवर किया था। विशेष अभियान 2.0 दो चरणों में चलाया गया था।
 
चरण 1 के दौरान मंत्रालय विभाग ने अधिकारियों को संवेदनशील बनाया, अभियान के लिए जमीनी कार्यकर्ताओं को संगठित किया, चिन्हित कैटेगरी में पेंडेंसी की पहचान की, अभियान स्थल के अंतिम रूप दिया, स्क्रैप और अनावश्यक सामग्री की पहचान कर और उनके निपटान के लिए निर्धारित प्रोसेस को पूरा किया। अभियान का फोकस मंत्रालय विभाग और उनके अधीनस्थ कार्यालय के अलावा फील्ड बाहरी कार्यालयों पर भी था। सेवा वितरण एवं सार्वजनिक संपर्क के लिए जिम्मेदार कार्यालय पर विशेष ध्यान दिया गया।
 
 चरण 2 मंत्रालय विभाग ने दिनांक 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक सभी चिन्हित संदर्भ पेंडिंग केस के निपटान के लिए प्रयास किया और निपटान की प्रगति की सूचना एसीपीडीएम पोर्टल पर दी। मंत्रालय विभाग में नोडल अधिकारी ने दैनिक आधार पर प्रगति की समीक्षा की और सचिव ने साप्ताहिक अधिकार पर समीक्षा की। इसके अलावा एक हैशटैग स्पेशल कैंपेन 2 प्वाइंट ओ भी बनाया गया। जिसका उपयोग सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया गया।
 
1. विशेष अभियान के दौरान गतिविधियों को करने के लिए डिएआरपीजी के गाइडलाइन के निर्देश अनुपालन में डिपार्टमेंट द्वारा की गई कार्यवाही अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए डिपार्टमेंट द्वारा कार्रवाई की गई। विभाग के अंतर्गत सभी प्रभाग, संगठनों को कार्यालय ज्ञापन दिनांक 5 सितंबर 2022 के माध्यम से गाइडलाइन दिया गया था कि वे अपने पेंडिंग कामों की पहचान करें और अभियान की सफलता सुनिश्चित की जा सके।
 
2. किशोर बाबूराव सुरवाडे, उप महानिदेशक प्रशासन को विभाग के साथ साथ संलग्न कार्यालयों में विशेष अभियान 2.0 के कार्यान्वयन की प्रगति की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया था।
 
3. कार्यालय ज्ञापन दिनांक 13 सितंबर 2022 द्वारा डिपार्टमेंट के अंतर्गत सभी कार्यक्रम प्रभावों संगठनों को एससीडीपीएम पोर्टल में आगे अद्यतन करने के लिए स्थापना अनुभाग को निर्धारित प्रारूप में पेंडिंग संदर्भों पर इनपुट प्रिंट करने का गाइडलाइन दिया गया था।
 
4.कार्यालय ज्ञापन दिनांक 3 अक्टूबर द्वारा विभाग के अंतर्गत सभी कार्यक्रम प्रभागों, संगठनों को निर्धारित प्रारूप में चिन्हित पंडिंग संदर्भ के निपटान की प्रगति विभाग को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
 
5. उप महानिदेशक की अध्यक्षता में 22 सितंबर को विभाग के अधिकारियों सहित अन्य संगठनों के प्रमुख के साथ एक आभासी बैठक बुलाई गई थी जिसमें डीडीजी द्वारा सभी संबंधित को जारी किए गए निर्देशों के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। विशेष अभियान 2 पॉइंट को सफल बनाने के लिए कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया गया।
 
6.विभाग के प्रशासन विभाग ने विशेष अभियान 2.0 की प्रगति की पुरजोर निगरानी की विभाग में सचिव द्वारा भी अभियान की समीक्षा की गई।
 
7.

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Source: safalta

माननीय मंत्री SJ and E के निर्देश पर विभाग केअधिकारियों को भी बाहरी क्षेत्रीय संगठनों में अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए प्रतिनियुक्त किया गया था।
 
8. सोशल मीडिया अभियान दैनिक आधार पर ट्विटर, फेसबुक पर उचित हैसटैग और इंफोग्राफिक्स भी चलाया गया। संदेशों को डिएआरपीजी के हैशटेग स्पेशल कैंपेन 2 .0 भी प्रदर्शित किया गया था।
 
9. विभाग के अनुभागों को यह निर्देश दिया गया था कि आर के पुरम और डिजिटाइजेशन के बाद इसे खत्म कर दिया गया ।
अभियान के दौरान 64 एमपी संदर्भ, 4 संसदीय आश्वासन, 4अंतर मंत्रालयी संदर्भ, 3 राज्य सरकार संदर्भ, 707 लोक शिकायत, 10  पीएमओं संदर्भ और 16 लोक शिकायत अपील के लक्ष्य प्राप्त किए गए।
 
10. इसके अलावा 6,631 वर्ग फुट की जगह खाली कर दी गई, 12762 भौतिक पायलट को हटाया गया।  1,29,99,753 अप्रचलित वस्तुओं को भेचकर कमाया गया और देश भर में 88 आउटडोर और इंडोर स्वच्छता अभियान आयोजित किए गए।
 

Water Week 2022, वाटर वीक क्यों मनाया जाता है, जाने इस साल के थीम के बारे में

 
Water Week 2022: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंडिया वाटर वीक का उद्घाटन किया। नॉलेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट एंड सेंटर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न देशों के 2000 से अधिक प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम 5 नवंबर तक चलेगा। राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के मौजूदगी में इस कार्यक्रम का शुरुआत हुआ, 5 दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में जल संरक्षण, जल के उपयोग एवं जल स्त्रोतों को संरक्षित करने के विषय पर चर्चा होगी।

 क्या है वाटर वीक की थीम 
वाटर भी कार्यक्रम की थीम Seeing the unseen, The Value of Water अर्थ समानता के साथ सतत विकास के लिए जल सुरक्षा रखा गया है।

 क्या है इस कार्यक्रम का महत्व 
कार्यक्रम में कई तकनीकी सत्र के साथ प्रेजेंटेशन से पानी के विषय में जागरूक किया जाएगा। इससे पहले साल 2019 में दिल्ली में इस Water Week का आयोजन किया गया था। उस दौरान 1500 एक्सपर्ट ने कार्यक्रम में भाग लिया था। इस साल कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण को लेकर उपाय, तकनीक प्रबंध के प्रभावी तरीकों के ऊपर चर्चा किया जाएगा और साफ पानी के संरक्षित करने का काम और तरीकों के बारे में बताया जाएगा।

 कब हुई थी इसकी स्थापना 
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह बताया है कि लगभग 22 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, अधिकारी, विषय विशेषज्ञ एवं मंत्री इस में भाग लेने वाले हैं। विश्व में सिंगापुर, स्कॉटहोम, अमेरिका में ऐसे सम्मेलन होते हैं, जिसमें सभी देश को इससे फायदा होता है। इंडिया Water Week  की स्थापना साल 2012 में हुई थी। कोरोनावायरस के चलते पिछले 2 साल से Water Week आयोजन नहीं हो पाई थी। इसके जरिए पानी से जुड़े मंत्रालय, राज्य, अंतरराष्ट्रीय संगठन, एनजीओ एक जगह एकजुट होकर पानी के संरक्षण के ऊपर चर्चा करते हैं।

 

All Souls Day 2022, ऑल सोल्स डे क्यों मनाया जाता है, जाने इसके महत्व एवं इतिहास के बारे में

 

All Souls Day 2022 : ईसाई धर्म में ऑल सोल्स डे का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल 2 नवंबर के दिन ईसाई धर्म के लोग आत्माओं का यह दिन मनाते हैं। जिसे ऑल सोल्स डे के नाम से जाना जाता है। इस दिन ईसाई धर्म के लोग अपने परिजनों, मित्रों की आत्माओं को सम्मानित करने के लिए याद करते हैं। ईसाई धर्म के लोगों का कहना है कि इस दिन स्वर्ग में बैठे उनके करीबी लोगों की आत्माएं उनके लिए दुआ की जाती है। वह इस बात का एहसास दिलाते हैं कि वे बहुत खुश हैं,

ऑल सोल्स डे का इतिहास 

 दरअसल ऑल सोल्स डे फ्रांस के ईसाई लोगों के द्वारा शुरु की गई है, जिससे 998 एडी में पहली बार मनाया गया था। छोटे स्तर पर लोगों ने मरे हुए लोगों की आत्माओं को सम्मानित करने के लिए इस दिन को ऑल सोल्स डे के रूप में नामित किया और मनाया। इसकी शुरुआत पहले बहुत छोटे स्तर पर हुई थी लेकिन एक दशक के अंदर यह दिन विश्व भर में मनाया जाने लगा।

ऑल सोल्स डे कैसे मनाया जाता है

 ईसाई धर्म के लोग इस दिन को तरह-तरह और अपने तौर तरीके से मनाते हैं। कई देशों में ऑल सोल्स डे के दिन घंटी, मोमबत्ती जलाकर आत्माओं को याद किया जाता है। वहीं कुछ देशों में बच्चों को केक खिलाया जाता है और इस दिन को सेलिब्रेट किया जाता है। ईसाई धर्म से जुड़े भजन और गीत गाए जाते हैं, मेक्सिको में इस दिन लोग अपने परिजनों की याद में दुखी होकर नहीं मनाते बल्कि खुशी से इस दिन को मनाते हैं कि उनके परिजनों की आत्मा स्वर्ग में खुश होगें और उन्हें आशीर्वाद देगें।

 

02-11-2022

  National Tribal Dance Festival, छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव क्या है जाने विस्तार से

Chhattisgarh National Tribal Dance Festival: हर साल 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस मनाता  है इस साल छत्तीसगढ़ अपना 23वां राज्य स्थापना दिवस मना रहा है। और इस समारोह के एक भाग के रूप में रायपुर तीसरे राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव की होस्टिंग किया है। राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव 1 नवंबर 2022 से 3 नवंबर 2022 तक मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से राज्य के अन्य प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री एवं अधिकारियों को राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया है।

 इस लेख के मुख्य बिंदु 

छत्तीसगढ़ में तीसरे राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया है।
 राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के आदिवासी नृत्य समूह में भाग लेंगे।
 राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव का मुख्य आकर्षण मंगोलिया, टोंगो, रूस, इंडोनेशिया, मालदीव और मोजा़म्बिक सहित अन्य देश भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
 इस आयोजन में करीब 1500 आदिवासी कलाकार भाग लेंगे, जिसमें 1400 भारत के और अन्य देश के कलाकार शामिल होंगे।
 महोत्सव में 2 केटेगेरी में प्रतियोगिता आयोजित होगी और विजेता को 2000000 रुपए से पुरस्कृत किया जाएगा।
 इस पुरस्कार में पहले दूसरे और तीसरे विजेताओं को क्रमशः 5 लाख तीन लाख ₹200000 के नगद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

 

Data Center Park, डाटा सेंटर पार्क क्या है जाने इसके महत्व के बारे में विस्तार से

 

Data Center Park : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में आगामी डाटा सेंटर पार्क में 5000 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित और 3,00,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैले उत्तर भारत के पहले हाइपरस्केल डाटा सेंटर Yotta Yotta d1 का लांच किया है। इस अवसर पर अगले 5 सालों में प्रोजेक्ट पर खर्च करने के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार और हीरानंदनी समूह के बीच ₹39000 करोड़ के समझोता पर साइन किया गया है। 

डाटा सेंटर पार्क का महत्व

 डाटा सेंटर देश के डाटा स्टोरेज क्षमता को बढ़ाएगा जो अब तक केवल 2 परसेंट था। इस तथ्य के बावजूद की दुनिया में 1.5 बिलीयन मोबाइल फोन और 650 मिलियन इंटरनेट यूजर्स में 20 परसेंट डेटा का उपयोग करने वाले भारत में है। फिर भी डाटा के स्टोरेज के लिए हमें विदेशों में सेंटर की तलाश करनी पड़ती है।  एक आधिकारिक बयान के मुताबिक डाटा सेंटर नीति साल 2021 में अधिसूचित किया गया था। नीति के अंतर्गत विभिन्न इन्वेस्टर्स द्वारा चार डाटा सेंटर पार्क स्थापित करने का कार्य वर्तमान में ₹15950 करोड़ से अधिक के इन्वेस्टमेंट के साथ प्रक्रियाधीन है। जिसमें हीरानंदानी ग्रुप की में मेसर्स एनआईडीपी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, जापान के मेसर्स एनटीटी ग्लोबल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की 2414 करोड़ रुपए की 2 प्रोजेक्ट शामिल है। 2713 करोड़ रुपये के इन प्रोजेक्ट के शुरू होने से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
 इस लेख से जुड़े महत्वपूर्ण फैक्ट
 उत्तर प्रदेश के राज्यपाल कौन है 
आनंदी बेन पटेल
 उत्तर प्रदेश की राजधानी क्या है 
लखनऊ कार्यकारी शाखा 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कौन है
 योगी आदित्यनाथ

 

Two Finger Test, टू फिंगर टेस्ट क्या है और SC ने इसपर बैन क्यों लगाया है

 

Two Finger Test : सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर को बलात्कार के मामलों में टू फिंगर टेस्ट पर बैन लगाया है और चेतावनी दी है कि इसके तहत टेस्ट का उपयोग करने वाले व्यक्ति को दोषी माना जाएगा। यह देखते हुए कि टेस्ट एक पितृसत्तात्मक मानसिकता पर बेस्ड है जिसमें यह माना जाता है कि यौन सक्रिय महिलाओं का बलात्कार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और हेमा कोहली की पीठ ने इस पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इस तरह के परीक्षण पर बैन लगाया जाए।

 टू फिंगर टेस्ट पर एससी ने क्या कहा है 

इस अदालत ने बार-बार बलात्कार एवं यौन उत्पीड़न के मामलों में दो उंगलियों के परीक्षण के उपयोग को खारिज किया है। तथाकथित परीक्षण का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है इसके बजाय महिलाओं को फिर से पीड़ित और उनके मन को ठेस पहुंचाता है। टू फिंगर टेस्ट नहीं करवाना चाहिए परीक्षण एक गलत धारणा पर आधारित है। एक सक्रिय महिला का बलात्कार नहीं किया जा सकता है सच्चाई से कुछ भी दूर नहीं हो सकता है। पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यौन उत्पीड़न और बलात्कार से बचे लोगों का टू फिंगर टेस्ट ना किया जाए। एक महिला की गवाही का संभावित मूल्य उसके योन इतिहास पर निर्भर नहीं करता है ।यह सुझाव देना कि पितृसत्तात्मक और सेक्सिस्ट है कि एक महिला पर विश्वास नहीं किया जा सकता है जब वह कहती है कि उसके साथ केवल इसलिए बलात्कार किया गया है क्योंकि वह यौन रूप से सक्रिय है, यह बात पीठ ने कहा है। शीर्ष अदालत की टिप्पणी तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर निर्णय लेते वक्त की गई है। जिसमें एक निचली अदालत द्वारा बलात्कार के मामले में दर्ज दोषसिद्ध को उलट दिया है।

 टू फिंगर टेस्ट क्या है 

दो उंगली परीक्षण एक स्पष्ट रूप से दखल देने वाली शारीरिक परीक्षा है, जिसमें एक डॉक्टर एक बलात्कार पीड़िता की योनि के अंदर दो उंगलियों को जांचने के लिए सम्मिलित करता है कि हाइमन बरकरार है या नहीं। यह निर्धारित करने के लिए योनि की मांसपेशियों की शिथिलता की जांच की जाती है कि महिला ने इंटरकोर्स किया है या इंटरकोर्स के अधीन किया गया है।  

 एससी का पूर्व निर्णय 

 

साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीड़ितों पर उंगली परीक्षण पर इस आधार पर बैन लगाया था कि उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है ।अदालत ने सरकार से यौन उत्पीड़न की पुष्टि के लिए बेहतर चिकित्सा प्रक्रिया उपलब्ध करवाने के लिए कहा था। साल 2018 में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार संयुक्त राष्ट्र एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महिला के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए किया था। उन्होंने इसे चिकित्सीय रूप से अनावश्यक और दर्दनाक, अपमानजनक अभ्यास घोषित किया था। जिसे बंद करना चाहिए फिर भी कुछ मामलों में टू फिंगर टेस्ट का अभ्यास जारी है। 

 

Vigilance Awareness Week, सतर्कता जागरूकता सप्ताह क्या है, जाने विस्तार से

 

Vigilance Awareness Week : केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा 31 अक्टूबर से 6 नवंबर तक इस साल निम्नलिखित विषय के तहत सतर्कता जागरूकता सप्ताह मना रहा है। जिसमें इस साल का थीम एक विकसित राष्ट्र के लिए भ्रष्टाचार मुक्त भारत रखा गया है। सतर्कता जागरूकता सप्ताह साल 2022 के अग्रदूत के रूप में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने सभी मंत्रालय, विभाग, संगठन के फोकस क्षेत्रों के रूप में कुछ निवारक सतर्कता पहलुओं को उजागर करते हुए 3 महीने का अभियान चलाया था। आइए जानते हैं इस सतर्कता सप्ताह के बारे में विस्तार से 
 

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फोकस क्षेत्रों में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल है 

संपत्ति प्रबंधन आस्तियों का प्रबंधन 
रिकॉर्ड प्रबंधन 
तकनीकी पहल जिसमें दो पैरामीटर शामिल है 
वेबसाइट रखरखाव एवं अद्यतन 
ग्राहकों के लिए सेवा वितरण के लिए नए क्षेत्रों की पहचान ऑनलाइन पोर्टल पर लाना और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने के लिए कदम उठाना 
जहां भी आवश्यकता हो दिशा निर्देश परिपत्र नियमावली का अद्यतनीकरण करना 
शिकायत का निपटान करना 

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के बारे में विस्तार से 

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के आयोजन के क्रम में जिला एवं प्रखंड स्तर पर छात्रों, युवास शिक्षाविदों, सेवारत एवं सेवानिवृत्त सरकारी विभागों में जनसभाएं की जाएंगी। भ्रष्टाचार के खतरो के खिलाफ जन जागरूकता को बढ़ाने एवं भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में सभी हितधारकों  के समर्थन को सूचीबद्ध करने के लिए अधिकारियों, स्वयं सहायता समूह, गैर सरकारी संगठन एवं नागरिक समाज के लिए समाज के सदस्य के लिए, इनके अलावा स्कूल और कॉलेज के छात्रों के बीच भ्रष्टाचार विरोधी टीम पर वाद विवाद, प्रश्नोत्तरी, कार्टून, स्लोगन, पेंटिंग, रंगोली एवं पोस्टर प्रतियोगिता की आयोजन की जाएगी। जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर छात्र एवं समाज के विभिन्न वर्गों को शामिल करते हुए सार्वजनिक रैली स्थल और मैराथन आदि का भी आयोजन इस सप्ताह में किया जाएगा। 

केंद्रीय सतर्कता आयोग के बारे में 

केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास भ्रष्टाचार से लड़ने एवं लोक प्रशासन में अखंडता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम 2003 के तहत जनादेश है। यह केंद्र सरकार के तहत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करने एवं केंद्र सरकार और इसके तहत संगठनों के विभिन्न अधिकारियों को शासन में व्यवस्थित सुधार लाने के लिए सतर्कता कार्यों की योजना बनाने, निष्पादित करने और समीक्षा करने की सलाह देता है। इसके अलावा आयोग अपनी आउटरीच गतिविधियों के साथ ट्रांसपेरेंसी जवाबदेही एवं भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए नीति के प्रति आम आदमी विशेष रूप से युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है।

 

Center Doubles Fertilizer Subsidy , कीमतों में बढ़ोतरी के साथ उर्वरक सब्सिडी हुई दोगुनी

 

Center Doubles Fertilizer Subsidy : किसानों को कीमतों में तेज बढ़ोतरी से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तवर्ष 2023 के लिए बजट स्तर से उर्वरक सब्सिडी को दोगुना करके 2.15 ट्रिलियन रुपए करने की घोषणा की है। पिछले 1 साल में यूरिया, डीएपी और m.o.p. की वैश्विक कीमतों में तेजी से उछाल के कारण यह कदम उठाया गया है।  अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here

सरकार ने इस पर क्या कहा है 


विश्व स्तर पर उर्वरक की बढ़ती कीमतों के बावजूद देश में अपने किसानों को इस तरह की कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया है। बजट में 1.05 लाख करोड़ रुपए की उर्वरक सब्सिडी के अलावा किसानों को आगे बढ़ाने के लिए  1.10 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दी जा रही है।

 केंद्र सरकार ने कहा है कि खरीफ सीजन के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरक के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दर 60939 करोड़ रुपए होगी। जबकि पिछले साल पूरे 57 हजार एक सौ पचास करोड़ रुपए थी। यह मिट्टी के पोषक तत्व को बड़े पैमाने पर आयात किए जाते हैं।

 वित्त वर्ष 2012 में उर्वरक सब्सिडी पर बजट खर्च 1.6 लाख करोड़ रुपए थाय़ डीएपी सहित फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों की खुदरा कीमतों को 2010 में एनबीएस तंत्र के हिस्से के रूप में "फिस्ड सब्सिडी" शासन की शुरुआत के साथ विनियंत्रित किया गया था, हालांकि फाइनेंसियल इयर 2012 में डीएपी पर सब्सिडी लागत के साथ 60 परसेंट बढ़ गई है जो पहले 30 परसेंट से अधिक थी।

उर्वरक मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक, आयातित यूरिया की कीमत अप्रैल 2022 में 145 परसेंट से अधिक बढ़कर $930 प्रति टन हुई है, जो 1 साल पहले $380 प्रति टन था। इस तरह डीएपी और m.o.p. की कीमत अप्रैल 2022 में क्रमश 66% और 116% बढ़कर $924 प्रति टन और $590 प्रति टन हुई है। 

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इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण


 रूस यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष से पुल गैस की कीमत सितंबर 2022 में तिमाही दर तिमाही 10% बढ़ी है। पहले यह उम्मीद लगाई गई थी की कीमत धीरे धीरे कम होगी। रिपोर्ट में क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक नवीन वैद्यनाथ के हवाले से यह कहा गया है कि पूर्ण गैस की कीमत ने प्रत्येक डॉलर की बढ़ोतरी से घरेलू स्तर पर उत्पादित यूरिया पर सरकार का सब्सिडी का बोझ सात हजार करोड़ रुपए बढ़ जाता है जो उत्पादन मात्रा का 85% है।

 

 Dr G Hemaprabha Takes Charge at ICAR-SBI, डॉ जी हेमाप्रभा ने आईसीएआर-एसबीआई का कार्यभार संभाला

 Dr G Hemaprabha Takes Charge at ICAR-SBI : आईसीएआर-एसबीआई को संस्थान के अस्तित्व की एक सदी से भी अधिक समय में पहली महिला निदेशक मिली है। डॉक्टर जी हेमाप्रभा को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के अधीन कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड नई दिल्ली की सिफारिश पर साल 2024 तक आईसीएआर गन्ना प्रजनन संस्थान के निदेशक के रूप में अपॉइंट किया गया है।  

 डॉ जी हेमाप्रभा के बारे में 


डॉक्टर जी हेमाप्रभा  111 साल पुराने आईसीएआर गन्ना प्रजनन संस्थान की पहली महिला निदेशक है। गन्ना अनुवांशिक सुधार में 34 से अधिक सालों के रिसर्च अनुभव के साथ उन्हें गन्ने की 27 किस्में डिवेलप की है और 15 गन्ना अनुवांशिक स्टॉक रजिस्टर किया है।  

 भाकृअनुप - गन्ना प्रजनन संस्थान के बारे में

भाकृअनुप गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत प्रमुख और सबसे पुराना कृषि अनुसंधान संस्थान है। यह 1912 में स्थापित किया गया था। यह संस्थान पिछले 10 दशकों से देश की गन्ना के किस्मों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जिम्मेदार है, जिसमें गन्ने की उन्नत किस्में को डिवेलप करने और भारत में 23 से अधिक गन्ना रिसर्च स्टेशनों के गन्ना प्रजनन कार्यक्रम का समर्थन करने का दोहरा अधिकार है।               

 

रिस्पांसिबल स्टील प्रमाणन क्या है, और टाटा स्टील को क्यों दिया गया है

 ResponsibleSteel Certification : टाटा स्टील को जमशेदपुर झारखंड में अपनी तीन उत्पादन सुविधाओं के लिए जिम्मेदार स्टील प्रमाणन प्राप्त हुआ है। स्टील वर्क्स, ट्यूब डिवीजन और कोल्ड रोलिंग मिल प्रमाणन के साथ दुनिया भर में अन्य स्टील उत्पादक साइटों के समूह में शामिल हो गया है। यह टाटा स्टील के लिए ऐतिहासिक पल है और स्थिरता यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 
 

 विश्व स्तर पर स्टील इंडस्ट्री एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और हम स्टील का उत्पादन एवं उपभोग कैसे करते हैं इसके व्यापक प्रभाव को तत्काल संबोधित करने की जरूरत है।

 प्रमाणित साइटों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे मानक में अन्य स्थिरता के साथ पूरी तरह से संरक्षित है। उदाहरण के लिए अच्छा जल प्रबंधन सुनिश्चित करना, एक स्वस्थ और सुरक्षित कार्यस्थल बनाना, श्रम अधिकारों की रक्षा करना और स्थानीय समुदाय एवं अन्य हितधारकों के साथ जोड़ना। यह टाटा स्टील और इसमें शामिल सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि  

रिस्पांसिबल स्टील के बारे में 

रिस्पांसिबल स्टील स्टील इंडस्ट्री की पहली वैश्विक बहु-हितधारक मानक एवं प्रमाणन पहल है जो क्लाइमेट चेंज, विविधता, मानव अधिकारों एवं अधिक सहित प्रमुख चुनौती का समाधान करके एक स्थाई इस्पात उद्योग के निर्माण की दिशा में स्टील प्रोडक्ट उपभोक्ताओं और बिचौलियों के साथ काम करती है।  

 सभी प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य 


टाटा स्टील के सीईओ 
टी.वी. नरेंद्रन 

टाटा स्टील की स्थापना 
25 अगस्त 1907 जमशेदपुर झारखंड

 

UP Police Got New Insignia, उत्तर प्रदेश पुलिस को मिला नया प्रतीक चिन्ह, जाने चिन्ह के बारे में विस्तार से
 

UP Police Got New Insignia : आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर राष्ट्र की 75 साल की अथक सेवा के सम्मान स्वरूप उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक देवेंद्र सिंह चौहान द्वारा यूपी पुलिस के प्रतीक चिन्ह को लॉन्च किया गया है और इसका विमोचन किया गया है। 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के लौह पुरुष की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश पुलिस को एकजुट करने के लिए इस प्रतीक चिन्ह को लॉन्च किया गया है। इस प्रतीक चिन्ह को उत्तर प्रदेश पुलिस नियम 1986 के अध्याय 1 के अंतर्गत प्रस्तावित किया जा रहा है, जिसके तहत पुलिस महानिदेशक को वर्दी के पैटर्न को निर्धारित करने का अधिकार है।

प्रतीक चिन्ह से जुड़ी खास बातें 

उत्तर प्रदेश पुलिस के कलर में इस्तेमाल किए जाने वाले रंग नेवी ब्लू और रेड है। इसलिए प्रतीक चिन्ह में यही रंग और शेड शामिल किए गए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस के सभी रैंक सम्मान स्वरूप इस प्रतीक चिन्ह को वर्दी पर धारण करेंगे। जहां प्रतीक चिन्ह वर्दी के दाहिने हिस्से में नेम प्लेट के ऊपर पहनाया जाएगा। इस प्रतीक चिन्ह को डिजाइन करने के लिए फैशन डिजाइनर पूर्णिमा भिक्ता निफ्ट पासआउट की सहायता ली है।

 हर राज्य के पुलिस का अलग-अलग प्रतीक चिन्ह होता है

 हर प्रतीक चिन्ह को पुलिस महानिदेशक से लेकर सिपाही अपने वर्दी पर लगा सकते हैं। वर्दी की शर्ट की जेब के ऊपर नेम प्लेट के ऊपर लगाया जाता है। पुलिस की भाषा में प्रतीक चिन्ह को इनसिग्निया कहा जाता है। 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पुलिस कलर दिया था। अलग-अलग राज्यों की पुलिस के विशिष्ट प्रतीक चिन्ह होते हैं, जिनसे वे राज्य के मुताबिक चिन्हित किए जाते हैं (पहचाने जाते हैं)। यह पुलिस के अनुशासन का भी प्रतीक होता है।  उत्तर प्रदेश पुलिस का ध्येय वाक्य सुरक्षा आपकी संकल्प हमारा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पुलिस के आधुनिकरण पर इस समय विशेष जोर दे रहे हैं।

 

 

 Lakshmir Bhandar scheme Wins SKOCH Award , पश्चिम बंगाल की लक्ष्मीर भंडार योजना ने स्कोच पुरस्कार जीता है

 

 Lakshmir Bhandar scheme Wins SKOCH Award : पश्चिम बंगाल सरकार की लक्ष्मीर भंडार योजना ने महिला और बाल विकास श्रेणी में एसकेओसीएच पुरस्कार जीता है। यह पुरस्कार सरकार के साथ-साथ राज्य की लगभग दो करोड़ महिलाओं के लिए एक मान्यता है जिन्होंने योजना द्वारा सशक्त बनाया गया है। लक्ष्मी भंडार योजना के तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने 25 से 60 साल की आयु वर्ग में एक परिवार की महिला मुखिया को फाइनेंशियल हेल्प करने के लिए अगस्त 2021 में एक योजना की शुरुआत की थी इस योजना के अंतर्गत सामान्य जाति वर्ग की महिलाओं को हर महीने ₹500 और एससी एवं एसटी वर्ग की महिलाओं को लगभग ₹1000 हर महीने दिया जाता था। सरकार के सूत्रों ने यह कहा है कि राज्य सरकार इस योजना के लिए हर साल लगभग 11000 करोड़ रुपए खर्च करती है। बंगाल के जिले में जो लक्ष्मी भंडार योजना के तहत है उत्तर 24 परगना में सबसे अधिक लाभार्थी हैं। इसके बाद दक्षिण 24 परगना, उत्तर दिनाजपुर और हुगली हैं।

 इस कल्याणकारी योजना के लिए राज्य सरकार हर महीने लगभग 1090 करोड का भुगतान करती हैय़ राज्य सरकार उन लोगों के लिए 1 से 30 नवंबर के बीच एक विंडो दे रही है जिन्हें अभी तक लक्ष्मी भंडार योजना के लिए आवेदन नहीं किया है 1 नवंबर 1 से शुरू होने वाले दुआ सरकार शिविरों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

स्कोच पुरस्कार के बारे में 

साल 2003 में स्थापित स्कॉच अवार्ड सुशासन, समावेशी विकास, प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों में उत्कृष्टता परिवर्तन प्रबंध, कॉर्पोरेट नेतृत्व, कॉर्पोरेट प्रशासन, नागरिक सेवा वितरण, क्षमता निर्माण एवं अन्य के बीच सशक्तिकरण के लिए दिया जाता है।

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न 


पश्चिम बंगाल के राज्यपाल कौन है? 
ला गणेशन।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री कौन है?
 ममता बनर्जी।

 

04-11-2022

 

World Tsunami Awareness Day, विश्व सुनामी जागरूकता दिवस का इतिहास और महत्व क्या है

World Tsunami Awareness Day : हर साल 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य भविष्य में आने वाली आपदाओं को लेकर पहले से ही तैयारी की सके की जा सके ताकि ज्यादा से ज्यादा जान बचाई जा सके और जनधन की हानि ना हो। इस विषय में इस दिन जागरूकता के प्रचार प्रसार को बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। सुनामी दिवस के दिन सभी को सुनामी से होने वाले खतरे एवं इसके बचाव के उपाय के बारे में बताया जाता है। इस दिन प्राकृतिक आपदा सुनामी के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है और ऐसी स्थिति में कैसे निपटा जाए इसके विषय में जानकारी दी जाती है। विश्व में ऐसे कई देश है जहां हर साल सुनामी आती है।

 पहला विश्व सुनामी जागरूकता दिवस कब मनाया गया था 

पहला विश्व सुनामी जागरूकता दिवस 5 नवंबर 2016 को पूरे विश्व स्तर पर मनाया गया था। साल 2016 में विश्व सुनामी जागरूकता दिवस पर प्रभावी शिक्षा और निकासी ड्रिल थीम के साथ इस दिन को पहली बार मनाया गया था।  
यह जागरूकता दिवस आपदा जोखिम न्यूनीकरण साल 2016 के एशियाई मंत्री स्तरीय सम्मेलन एवं संयुक्त राष्ट्र के आपदा जोखिम न्यूनीकरण के आपसी सहयोग से नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।

 विश्व सुनामी जागरूकता दिवस का महत्व 

संयुक्त राष्ट्र देशों, अंतरराष्ट्रीय निकायों से जागरूकता बढ़ाने एवं जोखिमों को कम करने के लिए नवीन दृष्टिकोण साझा करने के लिए यह दिन मनाने के लिए आवाहन करता है। साल 2030 के अंत तक तटीय क्षेत्रों में रहने वाले विश्व जनसंख्या का लगभग 50 परसेंट तूफान सुनामी और बाढ़ के संपर्क में आने वाला है।

 विश्व सुनामी दिवस का इतिहास 

संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में दिसंबर 2015 में हर साल 5 नवंबर को विश्व सुनामी दिवस जागरूकता दिवस की घोषणा की है। इसे लेकर दुनिया के कई देश एक साथ आए और यूएन से मांग की जिसके बाद से हर साल विश्व स्तर पर 5 नवंबर को सुनामी जागरूकता दिवस मनाया जाता है।

 सुनामी क्या है 

सुनामी बंदरगाह में आने वाले लहरों को कहा जाता है क्योंकि वे तटीय क्षेत्र एवं बंदरगाहों में अधिकतम नुकसान का कारण बनते हैं। यह सैकड़ों किलो मीटर चौड़ाई वाले लहर होती है इनकी गति 420 किलोमीटर प्रति घंटा और ऊंचाई 10 से 20 मीटर तक हो सकती है, अक्सर समुद्री भूकंप के कारण यह तूफान पैदा होती है। एक्सपर्ट का कहना है कि सुनामी की गति उतनी होती है जिस गति से एक हवाई जहाज उड़ता है। विश्व सुनामी जागरूकता दिवस के अवसर पर प्राकृतिक आपदाओं को लेकर लोगों को जागरूक एवं शिक्षित करने की आवश्यकता होती है। इससे आपदा आने पर बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है, साथ ही बड़ी संख्या में जन एवं धन दोनों की रक्षा की जा सकती है। लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना चाहिए कि प्राकृतिक आपदा आने पर उन्हें क्या करना चाहिए और शुरुआती कदम क्या होने चाहिए जिससे वे अपने जन एवं धन की रक्षा कर सकें।

 

07-11-2022

 

Janjatiya Gaurav Divas, जनजातीय गौरव दिवस कब और क्यों मनाया जाता है

Janjatiya Gaurav Divas : केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में शिक्षा मंत्रालय देशभर के सभी स्कूलों, कौशल और उच्च शिक्षण संस्थानों में इस वसाल जनजातीय गौरव दिवस भव्य तरीके से मनाया जाएगा। पिछले साल केंद्र सरकार ने बहादुर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को समर्पित करते हुए 15 नवंबर की तिथि को जनजातियां गौरव दिवस के रूप में नामित किया था। हर साल 15 नवंबर को भारत में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। 

15 नवंबर को ही क्यों जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा

15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती है। जिन्हें देश भर के आदिवासी समुदाय द्वारा भगवान के रूप में सम्मानित एवं पूजा जाता है। बिरसा मुंडा एक प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और देश के श्रद्धेय आदिवासी नेता थे। उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार की शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी और अपनी जीवन काल तक एक महान व्यक्ति रहे, जिन्हें अक्सर भगवान के रूप में पूजा जाता था। बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ विद्रोह का आवाहन करते हुए आदिवासी आंदोलन का आयोजन और नेतृत्व किया था। उन्होंने आदिवासियों को उनकी संस्कृति और सांस्कृतिक जड़ों को समझाने एवं एकता का पालन करने के लिए एकजुट कर प्रोत्साहित किया था।

जनजातीय गौरव दिवस के बारे में

 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के लिए शिक्षा मंत्रालय एआईसीटीई, यूजीसी, केंद्रीय विद्यालयों, निजी विद्यालयों, सीबीएसई, केवीएस, एनवीएस और स्किलिंग ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। जनजातीय गौरव दिवस के रूप में राष्ट्रव्यापी देशभर के सभी शैक्षणिक संस्थानों में, स्वतंत्रता संग्राम में, जनजातीय नायकों के योगदान, सामाजिक गतिविधि आदि विषय पर डिबेट प्रतियोगिता जैसे अन्य कार्यक्रम आयोजित की जाएगी। बिरसा मुंडा एक बहादुर आदिवासी नेता में से एक थे। इनके योगदान को समारोह में हाईलाइट किया जाएगा और जो भी छात्र प्रतियोगिता कार्यक्रम में जीतेगा उसे सम्मानित भी किया जाएगा। जनजातीय गौरव दिवस भावी पीढ़ी को देश के लिए आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को स्वीकार कर उनकी विरासत को आगे बढ़ाने और आदिवासी संस्कृति कला और समृद्ध आदिवासी विरासत के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
 

World Travel Market, वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट क्या है और यह कब आयोजित किया जाता है

 
World Travel Market : केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय लंदन में 7 नवंबर से 9 नवंबर के बीच आयोजित होने वाले वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट में भाग लिया है। लगभग 2 सालों के बाद विदेशी पर्यटकों के लिए भारत में फिर से प्रवेश के मद्देनजर वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट में भारत की भागीदारी का बहुत महत्व है। पर्यटन मंत्रालय ने अपने एक बयान में यह कहा है कि भारत स्वयं को टूरिस्ट के फेवरेट प्लेस के रूप में प्रजेंट करने के लिए वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट साल 2022 में भाग ले रहा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में राज्य सरकारों, अन्य केंद्रीय मंत्रालयों, उद्योग भागीदारी के रूप में भारतीय उद्योग परिसंघ टूर ऑपरेटर और होटल मालिक समेत कुल 16 पक्ष को प्रेजेंटर के रूप में वर्ल्ड ट्रेवल मार्केट 2022 में भाग ले रहे हैं, इसमें भाग लेने का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुदाय के लिए विभिन्न टूरिस्ट प्रोडक्ट और हेल्थ वैल्यू ट्रैवल और लग्जरी ट्रेन को प्रेजेंट करना है। भारत को वैश्विक पर्यटन हब बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. पर्यटन मंत्रालय पर्यटन क्षेत्र को डिवेलप करने के लिए विशेष रूप से कोविड-19 के बाद इसे नई ऊंचाई देने और 2030 के टिकाऊ लक्ष्य विकास लक्ष्यों को हासिल करने में तेजी लाने के प्रयास कर रहा है।

 वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट क्या है 

वर्ल्ड मार्केट पर्यटन एवं इससे संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले सभी लोगों के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है। वर्ल्ड ट्रेवल मार्केट में इस क्षेत्र से जुड़ी तमाम विषयों पर चर्चा की जाती है। वर्ल्ड ट्रेवल मार्केट रोमांच जोखिम एवं एडवेंचर की दुनिया को और अधिक बेहतर और अच्छा बनाने के लिए काम करता है। यह प्लेटफार्म पेशेवर के लिए प्रेरणा शिक्षा, सोर्सिंग  एवं बेंचमार्किंग प्रोवाइड करता है। इस साल वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट की प्रदर्शनी की थीम द फ्यूचर ऑफ ट्रैवल रखा गया है।

 भारत ट्रैवल मार्केट में अपनी झलकियां प्रदर्शित करेगा 

लंदन में आयोजित होने वाले इस वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट साल 2022 में भारत अपने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े सभी झलकियां प्रेजेंट करेगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सामने वैश्विक पर्यटन उद्योग के हितधारको के समक्ष भारत की विविध पर्यटन प्रस्तुतियों को प्रेजेंट करने का सुनहरा अवसर प्रदान किया गया है। आने वाले भविष्य में भारत पर्यटन की दुनिया में सबसे उभरता हुआ केंद्र बनेगा और पर्यटन के क्षेत्र का व्यापक स्तर पर विकास करने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है। इन प्रदर्शनों से पर्यटन क्षेत्र के वैश्विक ग्लोबल इन्वेस्टर मिलने की उम्मीद बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र का और अधिक तेजी से डेवलपमेंट हो पाएगा।

 27 सितंबर को मनाया जाता है विश्व पर्यटन दिवस 

हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है इस साल पर्यटन दिवस की थीम थिंकिंग टूरिज्म रखा गया था। यह थीम पर्यटन के बारे में दुनिया की सोच में सुधार करने की जरूरत के ऊपर प्रकाश डालती है। कोरोना महामारी ने श्रीलंका, मालदीव एवं इंडोनेशिया जैसे देश के लिए पर्यटन क्षेत्र के महत्व को दिखाया गया है। इसलिए इसे और अधिक टिकाऊ बनाने की तत्काल आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन दुनिया भर में पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
 

Lal Krishna Advani Biography, लालकृष्ण आडवाणी कौन हैं, जाने इनके जीवन परिचय के बारे में

Lal Krishna Advani Biography : भारतीय जनता पार्टी - बीजेपी देश के एक जाना माना एवं चर्चित पार्टी में से एक है। भारतीय जनता पार्टी को लोग अटल बिहारी वाजपयी और लालकृष्ण आडवाणी के बगैर सोच भी नहीं सकते हैं। सबसे पहले इन्हीं दोनों व्यक्ति ने मिलकर भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी थी। इन दोनों व्यक्तियों का इस पार्टी को बनाने में महत्वपूर्ण और विशेष योगदान रहा है। लालकृष्ण आडवाणी साल 1951 से लेकर अब तक भारतीय जनता पार्टी में एक सक्रिय राजनेता की भूमिका निभा रहे हैं। आइए जानते हैं लालकृष्ण आडवाणी के बारे में विस्तार से  

लालकृष्ण आडवाणी के परिवार एवं शिक्षा 


लालकृष्ण आडवाणी का जन्म कराची के सिंधी परिवार में 8 नवंबर 1927 को हुआ था। उनके पिताजी एक व्यापारी थे और उनका नाम श्री किशनचंद आडवाणी तथा माता का नाम श्रीमती ज्ञानी देवी था। कराची में रहने के बाद यह परिवार भारत-पाकिस्तान बंटवारे में पाकिस्तान से मुंबई भारत आकर बस गई। लालकृष्ण आडवाणी की स्कूली शिक्षा सेंट मैट्रिक्स हाई स्कूल कराची से हुई, जिसके बाद उन्होंने हैदराबाद के एडीजी कॉलेज से अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की, इसके अलावा पाकिस्तान से भारत आने के बाद उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से अपनी वकालत की पढ़ाई भी पूरी की है। एलके आडवाणी का विवाह साल 1965 फरवरी में कमलादेवी से हुआ था। इनके एक बेटा और एक बेटी थी जिनका नाम जयंत आडवाणी और प्रतिभा आडवाणी है। प्रतिभा आडवाणी टीवी सीरियल निर्माता होने के साथ-साथ अपने पिता के साथ राजनैतिक कार्यों में भी सहायिका है साल 2016 में लालकृष्ण आडवाणी की पत्नी का हार्ट अटैक से निधन हो गया है।   


 लालकृष्ण आडवाणी का राजनैतिक करियर 


लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत 1942 में आरएसएस के स्वयंसेवी के रूप में किया था। r.s.s. एक हिंदू संगठन है, लालकृष्ण आडवाणी सबसे पहले जब कराची में ही थे तब आरएसएस के प्रचारक बने थे और r.s.s. को अपनी सेवा दिया करते थे, उन्होंने आरएसएस की कई शाखाएं की भी स्थापना की थी। जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ उसके बाद उन्होंने उन्हें भारत आने पर राजस्थान के मत्स्य अलवाड़ा भेजा गया, 1952 तक उन्होंने अलवाड़ में काम करने के बाद राजस्थान के भरतपुर, कोटा, बूंदी, झालावाड़, जिले में काम किया था। 


भारतीय जनसंघ के बारे में


1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने r.s.s. के साथ मिलकर भारतीय जन संघ की स्थापना की थी, आरएसएस के मुख्य सदस्य होने के नाते लालकृष्ण आडवाणी भी जन संघ से जुड़े थे। उन्हें राजस्थान में जनसंघ के श्री एसएस भंडारी के सचिव के पद पर अप्वॉइंट किया गया। लालकृष्ण आडवाणी बहुत ही कुशल राजनीतिक थे उनके कुशल नेतृत्व के दम पर जल्द ही उन्हें जनसंघ में जनरल सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त किया गया। राजनीति में अपना कदम आगे बढ़ाते हुए 1957 में उन्होंने दिल्ली की ओर कदम बढ़ाया, दिल्ली आने के बाद इन्हें दिल्ली के जनसंघ का अध्यक्ष अपॉइंट किया गया। उन्होंने 1967 में दिल्ली के महानगरीय परिषद चुनाव लड़ा और काउंसिल के नेता बने। राजनीति गुण होने के साथ-साथ लालकृष्ण आडवाणी में और भी अन्य बहुत सी प्रतिभाएं थी। 1966 के दौर में आरएसएस की सप्ताहिक पत्रिका में उन्होंने संपादक के.आर. मलकानी की भी सहायता की  थी।


 गृह मंत्री के रूप में कार्य 


1996 के चुनाव के बाद बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई और इसलिए उसे केंद्र में सरकार बनने के लिए राष्ट्रपति की ओर से प्रस्ताव भेजा गया, तब सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने मई 1996 में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की लेकिन इनकी सरकार मात्र 13 दिन तक ही ठीक पाई थी। फिर देश में 1966 से 1998 तक दो अस्थिर सरकार पहले एच. डी. देवगौड़ा देवेगौड़ा और बाद में आई के गुजराल की सरकार आई थी।

 इसके शासन के बाद एनडीए की सरकार बीजेपी ने एक बार फिर 1998 में वापसी कि और अटल बिहारी वाजपेई ने मार्च   1998 में एक बार फिर प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, 13 महीने बाद एनडीए से जयललिता ने अपना समर्थन वापस ले लिया जिसके बाद एनडीए की सरकार एक बार फिर मात्र 13 महीने के लिए बनी और 13 महीने बाद गिर गई लेकिन इस सरकार को वाजपेयी जी ने अगले चुनाव तक संभाल कर रखा और एल.के आडवाणी गृह मंत्री के रूप में उनके साथ रहे। इसके बाद एनडीए सरकार ने 2004 तक अपने पूरे कार्यकाल में कार्यरत रही और लालकृष्ण आडवाणी के पद में उन्नति हुई और उन्हें भारत के उप प्रधानमंत्री बनाया गया। 

08-11-2022

EWS Reservation,  5 जजों की बेंच ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर क्या फैसला लिया है

 

EWS Reservation : आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 परसेंट आरक्षण देना सही है, सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र सरकार के इस फैसले पर मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की बेंच ने 3-2 से 10 परसेंट आरक्षण का सपोर्ट किया है। इस केस में चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस एस. रविंद्र भट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। जस्टिस माहेश्वरी, जस्टिस त्रिवेदी और जस्टिस पारदीवाला ने आरक्षण का समर्थन किया है। वहीं जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस रविंद्र भट इसके खिलाफ हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की सरकार ने जनरल कैटेगरी के लोगों को आर्थिक आधार पर 10 परसेंट आरक्षण देने के लिए संविधान में 103 वां संशोधन अमेंड किया था, लेकिन इसमें सुप्रीम कोर्ट में 40 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थी इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित किया था।

बेंच के इन सभी जस्टिस ने आरक्षण को लेकर क्या कहा है 

जस्टिस दिनेश महेश्वरी 

आरक्षण सिर्फ आर्थिक और सामाजिक वर्ग से पिछड़े लोगों को ही नहीं बल्कि वंचित वर्गों को भी समाज में शामिल करने में एक मुख्य भूमिका निभाता है। इसलिए ईडब्ल्यूएस कोटा संविधान के मूल ढांचे को नुकसान पहुंचाता है और ना ही मौजूदा आरक्षण संविधान के कानूनों का उल्लंघन करता है।

 जस्टिस बेला त्रिवेदी 

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को भी एक अलग वर्ग मानना सही है, इसे संविधान का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता है। देश के आजादी के 75 वर्ष बाद हमें समाज के हितों के लिए आरक्षण की व्यवस्था पर पुनः विचार करने की आवश्यकता है। संसद में एंग्लो इंडियन के लिए आरक्षण समाप्त हो गया है। इसी तरह अन्य आरक्षण के लिए भी समय सीमा होना चाहिए, इसलिए 103 वें संशोधन की वैधता बरकरार रखी जाती है।

 जस्टिस जे.बी पारदीवाला 

डॉक्टर अंबेडकर का विचार था कि आरक्षण की व्यवस्था 10 साल तक रहे लेकिन यह अभी भी जारी है। आरक्षण को निहित स्वार्थ नहीं बनने देना चाहिए। संविधान के 103 वें में संशोधन की वैधता को बरकरार रखते हुए मैंने ( जस्टिस जे.बी पारदीवाला ने) सोचा है कि आरक्षण का पालन करना सामाजिक न्याय को सुरक्षित रखना है।

 चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रविंद्र भट

 एससी, एसटी और ओबीसी के गरीब लोगों को इससे बाहर करना भेदभाव है, हमारा संविधान बहिष्कार या भेदभाव की अनुमति नहीं देता है और यह संशोधन सामाजिक न्याय के ताने-बाने को कमजोर कर रहा है। इस तरह यह बुनियादी ढांचे को कमजोर कर रहा है। 
ईडब्ल्यूएस कोटा क्या है 

जनवरी 2019 में नरेंद्र मोदी की सरकार ने संविधान में 103 वां संशोधन लेकर इसके तहत देश में आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों  के लिए नौकरियां और शिक्षा के क्षेत्र में 10 परसेंट आरक्षण देने का प्रावधान बनाया था। कानूनी आरक्षण की सीमा 50% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए अभी भी देशभर में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को जो आरक्षण मिलता है वह 50 परसेंट के अंदर ही मिल रहा है, लेकिन सामान्य वर्ग का 10 फ़ीसदी कोटा, इस 50 फ़ीसदी सीमा के बाहर है। 2019 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह कहा था कि आर्थिक रूप से कमजोर 10 परसेंट आरक्षण देने का कानूनी उच्च शिक्षा एवं रोजगार में समान अवसर देकर सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
आर्थिक रूप से कमजोर किसे माना जाता है

 यह ईडब्ल्यूएस आरक्षण सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को ही दिया जाता है। इस आर्थिक रूप से कमजोर लोगों में वे लोग आते हैं जिनकी सालाना आय ₹800000 से कम होती है। समान वर्ग के ऐसे लोगों को नौकरियां और शिक्षा के क्षेत्र में 10 परसेंट आरक्षण दिया जाता है।
 
 

National Legal Services Day, राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है, जाने विस्तार से

 
 
National Legal Services Day : हर साल 9 नवंबर को कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के अधिनियमन के उपलक्ष में सभी कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा हर साल राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस मनाया जाता है। कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम और वादियों के अधिकार के अंतर्गत विभिन्न प्रावधानों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए इस दिन को मनाया जाता है।  
 
 राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस का इतिहास
 
11 अक्टूबर 1987 को कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 अधिनियमित किया गया था, और यह अधिनियम 9 नवंबर 1995 को प्रभावी हुआ था। राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण का गठन कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत 5 दिसंबर 1995 को समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रोवाइड करने और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए लोक अदालतों का आयोजन करने के लिए किया गया था। यह सभी नागरिकों के लिए उचित निष्पक्ष और न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने एवं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस की शुरुआत 1995 में हुई थी।
 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण क्या है
 
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के अंतर्गत देश में कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सेवा देने के लिए और विवादों के समाधान के लिए लोक अदालतों का आयोजन किया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश इसके मुख्य संरक्षक होते हैं और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दूसरे वरिष्ठ न्यायाधीश प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं। संविधान के अनुच्छेद 39a अवसर की समानता के आधार पर न्याय को बढ़ावा देने के लिए समाज के गरीब एवं कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सेवा प्रोवाइड करवाने का प्रावधान रखता है। अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 22(1) विधि के समक्ष समानता सुनिश्चित करने के लिए राज्य को बाध्य करता है।
 नालसा नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी के कार्य
 
नालसा देशभर में कानूनी सहायता कार्यक्रम एवं योजनाएं लागू करने के लिए राज्य कानून सेवा प्राधिकरण पर गाइडलाइन जारी करता है। मुख्य रूप से राज्य कानून सहायता प्राधिकरण, जिला कानूनी सहायता प्राधिकरण, तालुक कानूनी सहायता समिति आदि को निम्नलिखित कार्य नियमित आधार पर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
 
1. सुपात्र लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता देना।
2. विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटने के लिए लोक अदालतों का संचालन करना।
 
 मुफ्त विधिक सेवाएं कौन-कौन सी हैं
 
1. किसी कानूनी कार्यवाही में कोर्ट फीस और अन्य सभी प्रकार प्रभार अदा करना।
2. कानूनी कार्यवाही में वकील उपलब्ध करवाना।
3.कानूनी कार्यवाही में आदेशों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करना।
4. कानूनी कार्यवाही में अपील एवं दस्तावेज के अनुवाद और छपाई सहित पेपर बुक तैयार करवाना।
 
मुफ्त कानूनी सहायता पाने के लिए कौन-कौन पात्र हैं
 
महिलाएं एवं बच्चे, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के सदस्य, औद्योगिक श्रमिक, बड़ी आपदाओं जैसे हिंसा, बाढ़, सूखे, भूकंप एवं औद्योगिक आपदाओं आदि के शिकार लोग, विकलांग लोग, हिरासत में रखे गए लोग, ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय ₹100000 से अधिक नहीं है, बेगार या अवैध मानव तस्करी या व्यापार के शिकार लोग मुफ्त कानूनी सहायता पाने के लिए पात्र हैं।
 

 

Uttarakhand Foundation Day, उत्तराखंड का स्थापना दिवस कब मनाया जाता है

 

Uttarakhand Foundation Day : इतिहास में 9 नवंबर की तारीख उत्तराखंड के स्थापना दिवस के रूप में दर्ज है। उत्तराखंड की मांग को लेकर सालों से चल रहे आंदोलन के बाद 9 नवंबर साल 2000 को उत्तराखंड को 27 में राज्य के रूप में भारत गणराज्य में शामिल किया गया था। साल 2000 से 2006 तक इसे उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था लेकिन जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इसका उत्तरांचल नाम बदलकर उत्तराखंड रखा गया। 

उत्तराखंड की सीमाएं 

उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहे उत्तराखंड की सीमाएं उत्तर में तिब्बत एवं पूर्व में नेपाल से लगी हुई है। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश की सीमा में लगे हुए राज्य हैं। हिंदी और संस्कृत में उत्तराखंड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग के रूप में जाना जाता है। उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि कई प्राचीन धार्मिक स्थलों के साथ यह राज्य हिंदू धर्म में सबसे पवित्र भूमि के रूप में मानी जाती है। देश की सबसे बड़ी नदी गंगा और यमुना का उद्गम स्थल भी उत्तराखंड है।

 उत्तराखंड राज्य के प्राकृतिक संसाधन 

उत्तराखंड राज्य में बहुत समृद्ध प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जिनमें से नदियां, ग्लेशियर, घने जंगल से ढकी पर्वत की चोटियां शामिल हैं, इसमें चार सबसे पवित्र हिंदू मंदिर भी है जिन्हें उत्तराखंड के चार धाम के रूप में जाना जाता है वह है बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री है, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून है।

 कब हुआ उत्तरांचल का नाम उत्तराखंड 

उत्तराखंड संस्कृति से लिया गया शब्द है जिसका अर्थ है उत्तरी शहर इसका गठन उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार द्वारा उत्तराखंड क्रांति दल के संघर्ष के बाद किया गया था। जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों और आपदाओं पर ध्यान केंद्रित अलग राज्य की मांग की थी। 09 नवंबर 2022 को उत्तराखंड के रूप में गठित होने से पहले कई सालों तक चल रहे संघर्ष के बाद 1 जनवरी 2007 को उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड रखा गया। यह राज्य संस्कृति जातीयता और धर्म का समामेलन है और भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन क्षेत्र में से एक है। उत्तराखंड के सीमावर्ती राज्यों में तिब्बत, नेपाल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं।

 

Vaidik Ghadi, वैदिक घड़ी क्या है जिसका निर्माण उज्जैन में किया जा रहा है

 

Vaidik Ghadi : विश्व की पहली वैदिक घड़ी काल गणना के केंद्र माने गए हैं, मध्यप्रदेश में उज्जैन के जंतर मंतर यानी जीवाजी वेधशाला में अगले साल 22 मार्च गुड़ी पड़वा यानी नव संवत्सरारंभ के अवसर पर लगाई जाएगी। जिस टावर पर वैदिक घड़ी लगाई जाएगी उसके निर्माण कार्य का भूमि पूजन मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव और महापौर मुकेश टटवाल द्वारा किया गया है। इस टॉवर का निर्माण एक करोड़ 58 लाख रुपए में किया जाएगा। यह घड़ी वैदिक काल गणना के सिद्धांतों पर होगी, यह प्रतिदिन देश विदेश में अलग-अलग समय पर होने वाले सूर्योदय को भी सिंक्रोनाइज करेगी। इस वैदिक घड़ी के एप्लीकेशन में विक्रम पंचांग भी होंगे, जो सूर्योदय से सूर्यास्त की जानकारी के साथ ग्रह योग, भद्रा, चंद्र स्थिति, नक्षत्र चौघड़िया, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाएगा। वैदिक घड़ी ऐप के माध्यम से मोबाइल, पीसी और एन्य डिजिटल डिवाइस पर यह देखी जा सकती है। घड़ी के बैकग्राउंड ग्राफिक्स में सभी ज्योतिर्लिंग, ग्रह, राशि चक्र होंगे।

 टावर का निर्माण उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा दी गई ड्राइंग डिजाइन के मुताबिक नगर निगम द्वारा करवाया जाएगा। घड़ी की स्थापना विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा की जाएगी। शोध पीठ घड़ी का मोबाइल भी बनवाया जाएगा। यह घड़ी ना सिर्फ उज्जैन बल्कि विश्व के लिए एक बड़ी सौगात होगी। घड़ी के टावर के ऊपर टेलीस्कोप भी लगवाया जाएगा ताकि रात में आकाश में होने वाले खगोलीय घटनाओं का भी नजारा देखा जा सके।

वैदिक घड़ी क्या है 

वैदिक घड़ी में समय के साथ ही लग्न, ग्रहण, मुहूर्त एवं पर्व की जानकारी मिल सकती है। वैदिक घड़ी में मौजूदा ग्रीन विच पद्धति के 24 घंटे को 30 मुहूर्त घटी में बांटा गया है। समय को पल, घटी में बांटा गया है। हर घड़ी के नाम हर घटी के नाम दिए गए हैं, जैसे 12:00 बजे को आदित्य नाम दिया गया है, उसी प्रकार हर समय या घटी को एक अलग नाम दिया गया है। वैदिक घाटी में मौजूद ग्रीन विच पद्धति की समय गणना यानी घंटे, मिनट, सेकंड वाली घड़ी भी होती है।

 वैदिक घड़ी की खासियत क्या है 

1.वैदिक घाटी में समय देखने के साथ मुहूर्त ग्रहण, संक्रांति और पर्व की जानकारी भी मिलती है। 
2.वैदिक घड़ी इंटरनेट, जीपीएस से जुड़ी होने के कारण सभी लोग इसका उपयोग कर सकते हैं। 
3.यह घड़ी करंट लोकेशन के सूर्योदय के आधार पर समय की गणना कर सकती है।
4.इस घड़ी को मोबाइल और टीवी पर भी सेट किया जा सकता है। इसके लिए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी मोबाइल जारी किया गया है।
5. इस घड़ी में 1:00 से 12:00 के स्थान पर क्रमशः ब्रह्मा, अश्विनौ, त्रिगुणा, चतुर्वेदा, पंचप्राण, षड्रसाः, सप्तर्षयः, अष्टसिद्धयः, नवद्रव्याणि, दशदिशः, रुद्राः, और आदित्याः लिखा है। जिसमें से 12 आदित्य, 11 रुद्र, 8 वसु, दो अश्विनी कुमारों की गिनती सनातन धर्म के प्रसिद्ध 33 कोटि देवताओं में की जाती है।  

 

 

09-11-2022

 

G20 Logo, Theme, Website And App, जाने क्या है, जी20 लोगो, थीम, वेबसाइट और ऐप के बारे में विस्तार से

 

G20 Logo, Theme, Website And App : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की G20 की अध्यक्षता के लिए लोगो, थीम एवं वेबसाइट और ऐप को लांच किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल तरीके से  लोगो, थीम और वेबसाइट को लांच किया है। 

लोगो और थीम के बारे में 


G20 का लोगो भारत के राष्ट्रीय ध्वज की जीवंत रंगों से प्रेरित है, जिसमें केसरिया, सफेद और हरा एवं नीला रंग का उपयोग किया गया है। इसमें भारत के राष्ट्रीय फूल कमल के साथ पृथ्वी को जोड़ा गया है जो कि चुनौतियों के बीच विकास को दर्शा रहा है। पृथ्वी जीवन के प्रति भारत के धरती के अनुकूल उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जो प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस को प्रतिबिंबित करता है। G20 लोगों के नीचे देवनागरी लिपि में भारत लिखा गया है। G20 के लोगो डिजाइन के लिए एक ओपन कंपटीशन के दौरान मिली विभिन्न प्रविष्टियों से प्राप्त तत्वों का समावेश कर इस लोगो का निर्माण किया गया है। माईगव पोर्टल पर आयोजित इस कंपटीशन को 2 हजार से अधिक प्रविष्टियों के साथ उत्साहजनक रिस्पॉन्ड मिली थी। यह जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान जनभागीदारी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है। 

भारत की G20 की अध्यक्षता का थीम 


भारत की G20 की अध्यक्षता का विषय वसुदेव कुटुंबकम या एक धरती एक परिवार एक भविष्य महा उपनिषद के प्राचीन संस्कृत पाठ से लिया गया है। यह थीम जीवन के सभी मूल्यों मानव, पशु, पौधे और सूक्ष्मजीवों एवं धरती और व्यापक ब्रह्मांड में उनके परस्पर संबंध की पुष्टि करता है।  

 इस थीम के बारे में 


यह थीम व्यक्तिगत लाइफस्टाइल के साथ-साथ राष्ट्रीय विकास के स्तर पर अपने संबध्द,  पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ और जिम्मेदार ऑप्शन के साथ LIFE जीवन (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) पर भी प्रकाश डालती है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर परिवर्तनकारी कार्यवाही होती है और जीवन जिसके फलस्वरूप एक स्वच्छ, हरा भरा और उज्जवल भविष्य संभव हो पाता है। जी-20 के लोगों और थीम मिलकर भारत की जी-20 की अध्यक्षता के संबंध में एक पावरफुल मैसेज दे रहे हैं जो दुनिया में सभी के लिए न्याय संगत और समान विकास के लिए एक स्थाई समग्र जिम्मेदार है और इसी तरीके से प्रयास कर रहा है। 

यह लोगो और थीम जी-20 की अध्यक्षता के लिए उस अनूठे भारतीय दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अपने आसपास के इकोसिस्टम के साथ सामंजस्य में रहना सिखाता है। भारत के लिए जी-20 की अध्यक्षता अमृत काल की शुरुआत का भी प्रतीक है यह अमृत काल 15 अगस्त 2022 को आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के साथ शुरू होकर आजादी के 100 वर्ष तक यानी की 25 साल की अवधि और एक भविष्यवादी, समृद्ध, समावेशी एवं विकसित समाज जिसके मूल में मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने वाली एक महान और महत्वपूर्ण यात्रा है।

 जी-20 के वेबसाइट के बारे में 


प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के जी-20 की अध्यक्षता वाले वेबसाइट www.g20.in को भी लॉन्च किया है। यह वेबसाइट 1 दिसंबर 2022, (जिस दिन भारत जी-20 की अध्यक्षता का पदभार ग्रहण करेगा) को जी-20 की अध्यक्षता की वेबसाइट पर निर्बाध रूप से माइग्रेट हो जाएगी।  

 जी20 और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था के बारे में वास्तविक जानकारी के अलावा इस वेबसाइट में जी-20 से संबंधित सूचना के भंडारण के रूप में भी डेवलपमेंट और कार्य करने के लिए भी किया गया है। इस वेबसाइट में नागरिकों के लिए अपने सुझाव देने का एक अनुभाग भी शामिल किया गया है, जिससे वे अपना सुझाव दे सकते हैं।

जी20 ऐप के बारे में 

वेबसाइट के अलावा एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफार्म पर जी20 इंडिया नाम से एक मोबाइल ऐप भी जारी किया गया है।

 

World Science Day For Peace And Development, शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस के बारे में विस्तार से

 

World Science Day For Peace And Development : हर साल 10 नवंबर को संपूर्ण विश्व शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है जो पूरे विश्व स्तर पर मनाया जाता है। यह दिवस समाज में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका को हाईलाइट करता है और हर साल लोगों को जागरूक करने के लिए 10 नवंबर को यह दिन मनाया जाता है। यह दिन उभरते वैज्ञानिक मुद्दों पर बहस में व्यापक लोगों को शामिल करने की जरूरत के ऊपर भी प्रकाश डालता है। विश्व विज्ञान दिवस साल 2001 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को द्वारा घोषित किया गया थाय़ सबसे पहली बार यह साल 2002 में मनाया गया था।

 शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस के इतिहास के बारे में 

यूनेस्को द्वारा शांति एवं विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस साल 2001 में घोषित किया गया था। दुनिया भर में विज्ञान के लिए विभिन्न ठोस प्रोजेक्ट, प्रोग्राम और वित्तपोषण उत्पन्न किया गया है। 10 नवंबर 2002 को दुनिया भर में पहली बार शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस मनाया गया था।
 विश्व विज्ञान दिवस का उद्देश्य 

शांति और विज्ञान के लिए विश्व विज्ञान दिवस का उद्देश्य इस बात को सुनिश्चित करता है कि नागरिकों को विज्ञान के विकास के बारे में सूचित किया जाए। यह विज्ञान के बारे में हमारी समझ को व्यापक बनाने और हमारे समाज को अधिक टिकाऊ बनाने में वैज्ञानिकों की भूमिका के ऊपर प्रकाश डालता है।

 विश्व विज्ञान दिवस का महत्व

 शांति और स्थाई समाज के लिए विज्ञान की भूमिका पर लोगों को जागरूक करना है। देश के बीच साझा विज्ञान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देना है। समाज के लाभ के लिए विज्ञान के उपयोग के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को इनोवेट करना साथ ही विज्ञान के सामने आने वाली सभी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करना और वैज्ञानिक प्रयास के लिए समर्थन  एकत्र करना है ।
शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस 2022 का थीम क्या है

 

हर साल की तरह शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस के लिए इस साल भी एक नई थीम तय की गई है। इस साल की थीम सतत विकास के लिए बुनियादी विज्ञान तय किया गया है।

 

International Week of Science and Peace,  विज्ञान और शांति का अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह कब और क्यों मनाया जाता है

 
International Week of Science and Peace 2022: विज्ञान और शांति का अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह (International Week of Science and Peace) हर साल 9 नवंबर से 14 नवंबर पूरे 1 सप्ताह तक मनाया जाने वाला एक वैश्विक सप्ताह है। यह कार्यक्रम लोगों को बेहतर टेक्नोलॉजी डिवेलप करने और अपने देश में शांति कायम करने के लिए प्रोत्साहित एवं प्रेरित करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन आयोजन का वार्षिक उत्सव विज्ञान प्रौद्योगिकी और शांति को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम जनता में जागरूकता पैदा करने में योगदान देता है।

 विज्ञान और शांति का अंतरराष्ट्रीय सप्ताह का इतिहास क्या है 

विज्ञान और शांति का अंतरराष्ट्रीय सप्ताह विश्व में पहली बार 1986 को मनाया गया था और यह आयोजन काफी सफल रहा, इस आयोजन की सफलता और प्रभाव को देखते हुए लगातार हर साल आयोजकों के प्रयासों से इसका आयोजन शुरू हुआ। इसे दिसंबर साल 1988 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा विज्ञान और शांति के अंतरराष्ट्रीय सप्ताह के रूप में घोषित किया गया है, जिसके बाद हर साल 9 नवंबर से 14 नवंबर को विज्ञान और शांति का अंतरराष्ट्रीय सप्ताह मनाया जाता है।

 विज्ञान और शांति के अंतरराष्ट्रीय सप्ताह का महत्व और उद्देश्य

विज्ञान और शांति के अंतरराष्ट्रीय सप्ताह को मनाने का उद्देश्य विश्व स्तर में विज्ञान के उपयोगों के साथ शांति स्थापित करना है। साथ ही लगातार वैज्ञानिकों के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए यह सप्ताह का आयोजन किया जाता है। विज्ञान का हमारे जीवन में जिस प्रकार चमत्कार के रूप में काम करके हमारे दैनिक जीवन को सरल बनाती है उसी प्रकार विज्ञान का हमारे जीवन पर बुरा असर भी पड़ता है। जैसे न्यूक्लियर बम जो पूरे विश्व को तबाह करने की ताकत रखती है, जिस प्रकार एयर कंडीशनर हमें ठंडा हवा देती है लेकिन पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव यह है कि यह धीरे-धीरे तापमान को तेजी से बढ़ा रही है।
 

World Utility Day, विश्व उपयोगिता दिवस क्यों मनाया जाता है, जाने विस्तार से 

 

World Utility Day : हर साल नवंबर महीने के दूसरे गुरुवार को विश्व उपयोगिता दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व उपयोगिता दिवस 10 नवंबर गुरुवार को मनाया जा रहा है। विश्व उपयोगिता दिवस को मनाने का उद्देश्य पूरे धरती पर रहने वाले लोगों को यह बताना कि पृथ्वी को एक बेहतर जगह बनाना है अपनी दुनिया को सभी के लिए आसान बना सके। हर साल इस दिन को मनाने के लिए एक थीम तय की जाती है, जिसके आधार पर यह दिन मनाया जाता है और पूरे साल इसके ऊपर काम किया जाता है। आइए जानते हैं विश्व उपयोगिता दिवस के बारे में विस्तार से -
विश्व में उपयोगिता दिवस 2022 की थीम क्या है

विश्व में उपयोगिता दिवस 2022 की थीम है - अवर हेल्थ  OUR HEALTH

विश्व उपयोगिता दिवस के ऊपर महत्वपूर्ण कोट्स

अगली बड़ी चीज वह है जो आखिरी बड़ी चीज को उपयोग करने योग्य बनाती है - ब्लैक रॉस

डिजाइन केवल वह नहीं है जो वह दिखता है और जैसा लगता है, डिजाइन यह है कि यह कैसे काम करता है - स्टीव जॉब्स 

उपयोगिता वेब पर शासन करती है। सीधे शब्द में कहा गया है यदि ग्राहक को कोई उत्पादन नहीं मिल रहा है तो वह इसे नहीं खरीदेगा - जैकब नीलसन 

उपयोगिता लोगों के बारे में है और वे चीजों को कैसे समझते हैं और उनका उपयोग करते ,हैं न की तकनीक के बारे में - स्टीव क्रूग 
अच्छे डिजाइन का मतलब है कि कभी भी यहां क्लिक करें कहना न पड़े - शॉन लेस्ली
 
 
10-11-2022
 
 

NExT Replaced NEET PG Exam, NExT ने किया NEET PG परीक्षा को रिप्लेस, जाने क्या है एनईएक्सटी एग्जाम

 
NExT Replaced NEET PG Exam : मेडिकल के क्षेत्र या एमबीबीएस में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी खबर आई है। देश के सबसे बड़े एंट्रेंस एग्जाम में से 1 नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट पीजी NEET PG अगले साल आखरी बार आयोजित किया जा सकता है। देश में नेशनल मेडिकल कमीशन एनएमसी ने NEET PG एंट्रेंस टेस्ट को लेकर एक रिप्लेसमेंट प्लान तैयार किया है। इसके अलावा एमबीबीएस डिग्री पीजी में एडमिशन प्रैक्टिस के लिए और विदेशों में एडमिशन लेने के लिए भी यह एग्जाम देना अनिवार्य हो सकता है।
NExT से होगा मेडिकल कोर्स में एडमिशन 

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने के लिए अगले साल 2023 अप्रैल-मई में होने वाली NEET PG का एग्जाम आखिरी परीक्षा हो सकता है, इसके बाद पीजी मेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर दाखिला होगा।
दिसंबर 2023 में हो सकता है NExT एग्जाम 

ऑफिशियल रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार 8 नवंबर 2022 को हुए नेशनल मेडिकल कमीशन के हाई लेवल मीटिंग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को यह बताया गया है कि दिसंबर 2023 में नेशनल एग्जिट टेस्ट एग्जाम का आयोजन हो सकता है।
पुराने बैच के छात्रों को भी देना होगा नेशनल एग्जिट टेस्ट 

नेशनल एग्जिट टेस्ट दिसंबर 2023 में आयोजित की जाती है तो 2019-2020 बैच के एमबीबीएस छात्रों को परीक्षा देना होगा। कमीशन ने यह कहा है कि इस परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर 2024 - 2025 बैच के स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में एंट्री के लिए भी किया जा सकता है। एडमिशन प्रैक्टिस लाइसेंस और फॉरेन स्टूडेंट के लिए भी होगा यह एग्जाम जरूरी। एनएमसी के मुताबिक नेक्स्ट योग्यता फाइनल ईयर की एमबीबीएस डिग्री, मॉडर्न मेडिकल की प्रैक्टिस के लिए एक लाइसेंस एग्जाम और पीजी कोर्स में क्वालिफिकेशन के आधार पर एडमिशन और भारत में प्रैक्टिस करने के इच्छुक विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट छात्रों के लिए एक यह NExT एग्जाम स्क्रीनिंग परीक्षा के रूप में काम करेगा। नेक्स्ट एग्जाम आयोजित करने के लिए परीक्षा के तौर-तरीके, सिलेबस टाइप और पैटर्न जैसी तैयारी की आवश्यकता होती है,जिसके लिए छात्रों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना होगा। मेन एग्जाम से पहले मॉक टेस्ट करने होंगे। ऑफिसर का कहना है कि सभी को समान अवसर देने के लिए नेक्स्ट एग्जाम बहुत महत्वपूर्ण होगा, चाहे छात्र ने भारत में ट्रेनिंग की हो या विदेश में यह विदेशी मेडिकल ग्रैजुएट्स और आपसी मान्यता की समस्या को का समाधान करेगा।

 एम्स दिल्ली आयोजित कर सकता है नेक्स्ट एग्जाम 

रिपोर्ट में यह कहा गया है कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज  के बजाय अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एआईआईएमएस नई दिल्ली इस परीक्षा का आयोजन कर सकता है। इस मामले पर अभी फैसला लेना बाकी है।
 
 

Sovereign Green Bonds, सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड को मिली मंजूरी, जाने इसके बारे में विस्तार से

 
Sovereign Green Bonds : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के पहले सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क को अप्रूवल दे दिया है। इस मंजूरी के साथ पेरिस समझौते के लक्ष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूती मिलेगी, जिससे ग्रीन प्रोजेक्ट में ग्लोबल और डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने में सहायता मिलेगी। सॉवरने ग्रीन बॉन्ड जारी कर जुटाए जाने वाले राशि को सार्वजनिक क्षेत्र के प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट किया जाएगा जो अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेंसिटी को कम करने में सहायता करेगी।
जानें क्या है ग्रीन बॉन्ड योजना, जिसका बजट में रखा गया है प्रस्ताव

ग्रीन बॉन्ड के फ्रेमवर्क के बारे में

 केंद्र सरकार ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से 16000 करोड़ रुपए जुटा सकती है और इस  फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही यानी मई-जून के महिने में ग्रीन बांड जारी भी किया जा सकता है। ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ध्यान में रखते हुए इस बॉन्ड की अवधि लंबी हो सकती है, वित्त मंत्रालय के अनुसार यह फ्रेमवर्क 2021 में ग्लासगो में cop26 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पंचामृत के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है। साल 2022 - 2023 के लिए बजट बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण  ने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी कर ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए रिसोर्सेज एकत्र करने की बात कही थी।

ग्रीन बॉन्ड के बारे में

सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड ऐसे फाइनैंशियल इंस्ट्रूमेंट्स है जो एनवायरमेंटल रूप से टिकाउ और  क्लाइमेट सूटेबल प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट के लिए धन इकट्ठा करते हैं। सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड नियमित बॉन्ड की तुलना में पूंजी की अपेक्षाकृत लागत को कम करती है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत का पहला सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड तैयार किया गया है और इसके ढांचे के प्रावधानों के मुताबिक ग्रीन बॉन्ड जारी करने पर महत्वपूर्ण फैसले को मान्य करने के लिए ग्रीन फाइनेंस वर्किंग कमेटी (GFWC) का गठन किया गया था। नॉर्वे की सिसरो को भारत के ग्रीन बॉन्ड के ढांचे का इवैल्यूएशन करने के लिए सिलेक्ट किया गया था। सिसरो ने अच्छे अंक के साथ भारत को ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क को मीडियम ग्रीन का दर्जा दिया है।
 

National Education Day, राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के इतिहास और महत्व के बारे में

 

National Education Day : भारतीय शिक्षा के नींव रखने वाले भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने देश के शिक्षा को बेहतर करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम के जयंती के अवसर पर भारत में हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। मौलाना अब्दुल कलाम ने साल 1947 से 1958 के बीच पंडित जवाहरलाल नेहरू के सरकार के दौरान देश के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में काम किया था। मौलाना अबुल कलाम एक सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, एक विद्वान और प्रख्यात शिक्षाविद थे जो शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध थे।

अबुल कलाम के प्रारंभिक जीवन के बारे में 

साल 1988 में मक्का सऊदी अरब में अबुल कलाम का जन्म हुआ था। लोग इन्हें मौलाना अबुल कलाम आजाद के नाम से ज्यादा जानते थे। उन्होंने साल  1912 में ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ उर्दू में एक सप्ताहिक पत्रिका अल-हिलाल (al-hilal) की शुरुआत की थी, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने al-hilal को बैन कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने अल-बगाह नाम से एक और वीकली पत्रिका की शुरुआत की, मौलाना आजाद एक प्रसिद्ध शिक्षाविद, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते थे। मौलाना अबुल कलाम ने भारतीय शिक्षा संरक्षण संरचना को मजबूत बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन्होंने देश की शिक्षा के ढांचे में सुधार करने के लिए एक सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए बहुत मेहनत भी किया था। 
मौलाना अबुल कलाम के कार्यों के बारे में

इन्होंने नारी शिक्षा के लिए पुरजोर वकालत भी की थी। आज के समय में मौजूद आधुनिक शिक्षा प्रणाली को लाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो मौलाना अबुल कलाम को जाता है। शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान देश के पहले आईआईटी( IIT), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR),आईआईएससी (IISC),   भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (ugc ) की स्थापना हुई ।मौलाना आजाद ने पूर्वी शिक्षा और साहित्य में रिसर्च को भी बढ़ावा दिया था। उन्होंने ललित कलाओं को डिवेलप करने और भारत में सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक, अंतर संपर्क बनाने के लिए ललित कला, संगीत नाटक और साहित्य अकैडमी की स्थापना की थी। उन्होंने 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की भी वकालत की थी।

 राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मौलाना आजाद के जन्म दिवस के अवसर पर ही क्यों मनाया जाता है

 

 मौलाना आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था। इन्हें स्वतंत्र भारत में शिक्षा के प्रमुख वास्तुकार के रूप में भी जाना जाता है। राष्ट्र निर्माण, संस्था निर्माण और शिक्षा के क्षेत्र में मौलाना आजाद के योगदान को याद करने के लिए हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। मौलाना आजाद कहा करते थे कि स्कूल वह प्रयोगशाला है जो देश के भावी नागरिकों को तैयार करती है। इतिहासकारों के मुताबिक मौलाना आजाद ने उच्च शिक्षा और तकनीकी एवं वैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षा के साथ-साथ हाल ही में ज्ञान आधारित उद्योगों के नींव बी इन्होंने रखा था। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय एमएचआरडी ने 11 सितंबर 2008 को 11 नवंबर को राष्ट्रीय पर्व राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में घोषित किया था। पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का उद्घाटन 11 नवंबर 2008 को भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा विज्ञान भवन में किया था।

 

 

Biography of Maulana Azad, मौलाना आजाद के जीवन परिचय के बारे में विस्तार से 

 

Biography of Maulana Azad : भारत में शिक्षा की नींव रखने वाले अबुल कलाम आजाद का असली और पूरा नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन है लेकिन लोग इन्हें मौलाना आजाद के नाम से जानते हैं। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के दौरान मौलाना आजाद मुख्य सेनानी के रूप में सामने आए थे। आजाद एक महान वैज्ञानिक, राजनेता, शिक्षाविद् और कवि थे। भारत की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए इन्होंने अपने पेशेवर कार्य को छोड़ दिया और देशभक्ति के चलते देश की आजादी के लिए बाकी लोगों के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल हो गए। मौलाना आजाद महात्मा गांधी के साथ अहिंसा का साथ देते हुए सविनय अवज्ञा और असहयोग आंदोलन में भाग लिया था। अन्य मुसलमान लीडर जैसे मोहम्मद अली जिन्ना आदि से अलग मौलाना आजाद भारत देश की स्वतंत्रता को संप्रदायिक स्वतंत्रता से बढ़कर मानते थे। उन्होंने धार्मिक सद्भाव के लिए काम किया और देश के बंटवारे को लेकर कट्टर प्रतिद्वंदी भी थे। मौलाना आजाद लंबे समय तक भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी और भारत-पाकिस्तान विभाजन के गवाह भी बने। भारतीय होने के कारण इन्होंने स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान ना जाकर भारत में ही रहकर देश के विकास में कार्य किया और अपना योगदान दिया। इन्हें देश के पहले शिक्षा मंत्री बनाया गया और देश के शिक्षा पद्धति को सुधारने का जिम्मा इन्हें थमाया गया। 
मौलाना आजाद की जीवन परिचय के बारे में 

मौलाना आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का सऊदी अरब में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद खैरुद्दीन था जो एक बंगाली मौलाना थे और बहुत बड़े विद्वान भी थे। इनकी माता अरब की थी जो शेख मोहम्मद ज़हर वात्री की बेटी थी जो मदीना में एक मौलवी थी, जिन्हें अरब के अलावा बाहरी देशों में भी जाना जाता था। मौलाना खैरुद्दीन अपने परिवार के साथ बंगाल में रहते थे लेकिन 1857 के समय हुए विद्रोह के लड़ाई में इन्हें भारत छोड़ अरब जाना पड़ा जहां मौलाना आजाद का जन्म हुआ। मौलाना आजाद जब 2 साल के थे तब उनका परिवार 1890 में भारत वापस आए और कोलकाता में बस गया। 13 साल की उम्र में मौलाना आजाद का विवाह जुलेखा बेगम से हुआ।

 मौलाना आजाद की शिक्षा के बारे में 

मौलाना आजाद का परिवार एक रूढ़िवादी ख्यालों से घिरा हुआ था। इसका असर उनकी शिक्षा में भी पड़ा, मौलाना आजाद को  परंपरागत इस्लामी शिक्षा दी गई।  मौलाना आजाद के परिवार को इस्लामी शिक्षा का बखूबी ज्ञान था यह ज्ञान मौलाना आजाद को विरासत में मिली थी। आजाद की प्रारंभिक शिक्षा उनके घर पर ही पिता के द्वारा दी गई थी। इसके बाद उनके लिए एक शिक्षक नियुक्त किया गया जो उन्हें संबंधित क्षेत्रों में शिक्षित किए। आजाद ने सबसे पहले अरबी, फारसी भाषा सीखी इसके बाद इन्होंने दर्शनशास्त्र, ज्यामिति, गणित और बीजगणित का ज्ञान प्राप्त किया, इसके साथ ही उन्होंने बंगाली, उर्दू भाषा का भी ज्ञान अर्जन किया आजाद को पढ़ाई के क्षेत्र में बहुत रुचि था वह बहुत मन लगाकर पढ़ाई करते थे एवं खुद से अंग्रेजी, विश्व इतिहास एवं राजनीति के बारे में पढ़ा करते थे। मौलाना आजाद एक ऐसे मेधावी छात्र थे जिनमें विशेष ज्ञान की योग्यता थी जो उन्हें समकालीन से आगे रहने में हमेशा मदद करते थे। आजाद को एक विशेष शिक्षा और ट्रेनिंग दी गई जो कि मौलवी बनने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है।

 मौलाना आजाद स्वतंत्रता सेनानी के रूप में 

एक मौलवी के रूप में शिक्षा ग्रहण करने के बाद आजाद ने अपने इस काम को नहीं चुना और हिंदू क्रांतिकारियों के साथ मिलकर स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लिया।

 1912 में मौलाना आजाद ने उर्दू भाषा में 1 सप्ताहिक पत्रिका al-hilal की शुरुआत की थी। जिसमें ब्रिटिश सरकार ने बैन लगा दिया। इस अखबार में हिंदू मुस्लिम एकता पर बात लिखी जाती थी और युवाओं से अनुरोध किया गया कि वह हिंदू मुस्लिम की लड़ाई को छोड़कर देश की स्वतंत्रता के लिए लड़े और काम करें। इस साप्ताहिक अखबार के बैन होने के बाद मौलाना आजाद ने अल-बगाह नाम से दूसरी पत्रिका निकाली जो al-hilal की तरह ही काम करती थी। लगातार अखबार में राष्ट्रीयता की बात छापने से देश भर में आक्रोश पैदा हो गया जिससे ब्रिटिश सरकार को खतरा महसूस होने लगा। जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत की रक्षा के लिए विनियम अधिनियम के अंतर्गत अल-बगाह को भी बैन कर दिया। इसके बाद मौलाना आजाद को गिरफ्तार कर रांची रांची के जेल में बंद कर दिया गया जहां उन्हें 1 जनवरी 1920 तक रखा गया।

 मौलाना आजाद के खिलाफत आंदोलन शुरू किए जिससे मुस्लिम समुदाय को जागृत करने का प्रयास किया गया। आजाद ने गांधी के साथ हाथ मिलाकर उनके सहयोग से असहयोग आंदोलन में भाग लिया जिसमें ब्रिटिश सरकार की सभी सरकारी चीजों का बहिष्कार किया था। ऑल इंडिया खिलाफत कमिटी के अध्यक्ष मौलाना आजाद को चुना गया, बाकी खिलाफत लीडर के साथ मिलकर इन्होंने दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया संस्था की स्थापना की थी।

 इन्होंने गांधी जी एवं पैगंबर मोहम्मद से प्रेरित होने के कारण अपने जीवन में भी बड़ा बदलाव किया। अहिंसा को पूरी तरह से अपने जीवन में उतार लिया था। 1923 में आजाद को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। कम उम्र में पहली बार किसी नेता को यह पद दिया गया था, दिल्ली में एकता सम्मेलन में मौलाना आजाद ने खिलाफत एवं स्वराजी के बीच मतभेद कम करने की कोशिश की थी।

 भारत पाकिस्तान विभाजन के समय मौलाना आजाद ने भारत में मुस्लिम समुदाय की रक्षा की जिम्मेदारी ली, बंटवारे के समय ये बंगाल, बिहार, पंजाब एवं असम गए जहां यह लोगों के लिए रिफ्यूजी कैंप बनवाएं और उनके खाना एवं सुरक्षा की व्यवस्था करवाएं।

 पंडित जवाहरलाल नेहरु की सरकार में मौलाना को पहले कैबिनेट मंत्री मंडल में 1947 से 1958 तक शिक्षा मंत्री बनाया गया। शिक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद आजाद ने 14 साल से कम उम्र के सभी लोगों के लिए शिक्षा अनिवार्य कर दी थी, इसके साथ ही व्यस्क निरक्षरता, माध्यमिक शिक्षा और गरीब, महिलाओं की शिक्षा पर बल दिया था जिससे देश की उन्नति जल्द से जल्द की जा सके।

 मौलाना आजाद वैज्ञानिक शिक्षा पर विश्वास करते थे इन्होंने कई यूनिवर्सिटी एवं इंस्टिट्यूट का भी निर्माण करवाया था, जहां उच्च दर की शिक्षा मौजूद करवाई गई। मौलाना आजाद के तत्वाधान में ही देश का पहले आईआईटी, आईआईएससी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का निर्माण हुआ था।

मौलाना आजाद के उपलब्धियों के बारे में 

1989 में मौलाना आजाद की जयंती के अवसर पर भारत सरकार ने शिक्षा को देश में बढ़ावा देने के लिए मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन बनाया गया है।

 हर साल मौलाना आजाद के जन्म दिवस के अवसर पर 11 नवंबर को नेशनल एजुकेशन डे मनाया जाता है।

 भारत की शिक्षा संस्थान, स्कूल कॉलेज इनके नाम पर रखे गए हैं।

मौलाना आजाद को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है।

 मौलाना आजाद की मृत्यु के बारे में 

22 फरवरी 1958 को स्ट्रोक के चलते मौलाना आजाद की मृत्यु दिल्ली में हुई थी। मौलाना आजाद भारत में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने की शुरुआत की थी ।उनको देश में शिक्षा का संस्थापक कहना गलत नहीं होगा। आजाद मौलाना के योगदान एवं प्रयासों के चलते भारत में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा है, मौलाना यह बात जानते थे कि उन्नति एवं विकास के लिए शिक्षा का मजबूत और बेहतर होना बहुत महत्वपूर्ण है।
 

Armistice Day, स्मरण दिवस के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से

Armistice Day (Remembrance Day) : हर साल विश्व के 3 देश यूएसए यूके और कनाडा में 11 नवंबर को 1918 में पहले विश्व युद्ध के अंत के निशानी के रूप में स्मरण दिवस मनाया जाता है। इसे आमतौर पर युद्ध विराम दिवस के रूप में भी जाना जाता है। स्मरण दिवस उस संघर्ष की सेवा करते हुए शहीद सैनिकों के बलिदान को याद करने के लिए हर साल मनाया जाता है जो प्रथम विश्व युद्ध के दौरान देश की सेवा में शहीद हो गए थे।
 स्मरण दिवस का इतिहास क्या है 

स्मरण दिवस पहली बार 1919 में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान मनाया गया था। स्मरण दिवस को युद्ध विराम दिवस के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि 10 नवंबर 1919 को युद्ध विराम के समझौते पर हस्ताक्षर किए गया था जिससे ये पहला विश्व युद्ध रूका था, जो 11 नवंबर को पहले विश्व युद्ध की समाप्ति के लिए जिम्मेदार था।

 स्मरण दिवस का महत्व क्या है 

स्मरण दिवस का महत्व नागरिकों को पहले विश्वयुद्ध में देश के लिए शहीद हुए सैनिकों के बलिदान को याद रखना और उनके योगदान को सम्मानित करना है। अमेरिकी गृह युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को सम्मानित करने के लिए हर साल 30 मई को अमेरिका में स्मृति दिवस भी मनाया जाता है। साल 2000 में अमेरिकी सरकार ने सभी अमेरिकी नागरिकों को   शहीद सैनिकों को याद करने के लिए स्थानीय समयानुसार दोपहर 3:00 बजे रुक कर 2 मिनट के लिए मौन रहने के लिए कहा था।

संयुक्त राज्य अमेरिका ब्रिटेन और कनाडा में स्मरण दिवस कब मनाया जाता है 

यूके में साल के 11 महीने के 11 वे दिन सुबह 11:00 बजे पहले विश्वयुद्ध के दिन को चिन्हित किया जाता है। पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों और लोगों को याद करने के लिए सुबह 2 मिनट का मौन धारण किया जाता है।  ब्रिटेन के शाही परिवार और उनके शीर्ष राजनेता एक स्मारक सेवा के लिए लंदन में वाइट हाल में सिनोटाफ में इकट्ठा होते हैं। कनाडा में लोग हर साल 11 नवंबर को सुबह 11:00 बजे स्मरण दिवस के रूप में मनाते हैं क्योंकि यह पहले विश्व युद्ध के दौरान शत्रुता के अंत का प्रतीक है और सभी सैनिकों को याद करने का अवसर जिन्होंने कनाडा की रक्षा करते हुए अपनी जान की बाजी लगाई थी।

 

 

Guidelines for Television Channels, केंद्र ने टेलीविजन चैनल के लिए क्या गाइडलाइन जारी किया गया है  

 

Guidelines for Television Channels : भारत को अपलिंकिंग हब के रूप में प्रेसिडेंट करने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को टेलीविजन चैनल के लिए गाइडलाइन में छूट की घोषणा की है और मुख्य रूप से एंटरटेनमेंट चैनल के लिए 30 मिनट का दैनिक जनहित प्रसारण को अनिवार्य किया गया है। सरकार ने सेटेलाइट टेलीविजन चैनल के लिए संशोधित अपलिंकिंग और डाउन्लिंकिंग गाइडलाइन जारी किए हैं जिसके अंतर्गत अब भारतीय टेलिपोर्ट विदेशी चैनल को आप लिंक कर सकते हैं।

 अपलिंकिंग और डाउनलोडिंग के लिए क्या दिशा निर्देश हैं

 सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्रा ने संवाददाताओं से कहा है कि भारत में सेटेलाइट टेलीविजन चैनल के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए दिशानिर्देश 2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रूवल दे दिया है। इस नए गाइडलाइन के अंतर्गत टेलीविजन चैनलों के लिए हर दिन 30 मिनट के लिए राष्ट्रीय और सार्वजनिक हित से जुड़ी कंटेंट प्रसारित करना अनिवार्य होगा। नई दिशा निर्देश के अंतर्गत कार्यक्रमों के सीधा प्रसारण की अनुमति खत्म की गई है। सीधा प्रसारण किए जाने वाले कार्यक्रम को प्री रजिस्टर करवाना जरूरी होगा। गाइडलाइन के मुताबिक 1 से अधिक सेटेलाइट की सुविधाओं का उपयोग कर किसी चैनल को अपलिंक किया जा सकता है। नियमों के अनुसार सिर्फ एक ही टेलीपोर्ट या सेटेलाइट के जरिए किया जा सकता है। इन गाइडलाइन को 11 साल के बाद संशोधित किया गया है।

  इस कदम से इन देशों को होगा फायदा 

इस कदम से भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के टेलीविजन चैनल को सिंगापुर के बजाय भारत से अपलिंक करने की अनुमति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो उपमहाद्वीप में प्रसारित चैनलों के लिए पसंदीदा अपलिंकिंग हब है। ऑफिसर ने बताया है कि वर्तमान में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में रजिस्टर 897 में से केवल 30 चैनल को भारत से अपलिंकिंग है।

नए दिशानिर्देश के बारे में


 संयुक्त सचिव प्रसारण संजीव शंकर ने यह कहा है कि कार्यक्रम के सीधा प्रसारण के लिए अनुमति की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है। इसके लिए केवल लाइव प्रसारण के लिए कार्यक्रमों को पहले से रजिस्टर करवाना होगा। नए गाइडलाइन में यह कहा गया है कि एक कंपनी डिजिटल सेटेलाइट न्यूज़ गैदरिंग डीएसएनजी के अलावा अन्य समाचार इकट्ठा करने वाले उपकरण जैसे ऑप्टिक फाइबर, बैकपैक, मोबाइल का उपयोग कर सकती है, जिसके लिए अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक समाचार इकट्ठा करने वाले उपकरणों का उपयोग भी अब किया जा सकता है वह भी बिना अनुमति के। शिक्षा और साक्षरता के प्रसार के लिए, कृषि और ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, महिलाओं के कल्याण, कमजोर वर्गों के कल्याण जैसे राष्ट्रहित के विषय पर हर दिन 30 मिनट की जनहित कंटेंट प्रसारित करनी होगी।

 

11-11-2022

PM Modi South India Visit, पीएम मोदी दक्षिण भारत दौरे के दौरान इन परियोजनाओं का करेंगे शुभारंभ

PM Modi South India Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण भारत के 4 राज्यों की 2 दिवसीय यात्रा प्रारंभ कर दी है, इसमें कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे 4 राज्य शामिल है, जिसका प्रधानमंत्री 11 से 12 नवंबर तक दौरा करेंगे। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25,000 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय यात्रा के बारे में 
 
बेंगलुरु के विधानसौध में संत कवि श्री कनकदास और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। 
इसके बाद पीएम मोदी बेंगलुरु में के.एस.आर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत और भारत गौरव काशी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर लॉन्च करेंगे, यह दक्षिण भारत में अपने तरह की पहली ट्रेन होगी। 
इसके बाद केंपेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 को भी लॉन्च करेंगे। 
बेंगलुरु में नादप्रभु केंपेगौड़ा की कांस्य से बनी 108 फीट की प्रतिमा को लॉन्च करेंगे।
 दोपहर करें 3:30 बजे के आसपास तमिलनाडु के डिंडीगुल गांधी ग्राम ग्रामीण संस्थान के 36 वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगे।

 इन प्रोजेक्ट्स का करेंगे शुभारंभ 

प्रधानमंत्री शनिवार 12 नवंबर को सुबह करीब 10:00 बजे के आस पास आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में साढ़े दस हजार करोड़ के अलग-अलग प्रोजेक्ट को लॉन्च करेंगे और उनका शिलान्यास भी करेंगे।
इसके बाद दोपहर के वक्त नरेंद्र मोदी तेलंगाना के रामागुंडम में आरएफसीएल प्लांट का दौरा करेंगे और कई प्रोजेक्ट को लॉन्च करेंगे, इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई और अन्य दूसरी प्रोजेक्ट को भी लांच करेंगे।

 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को दिखाया हरी झंडी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 2 दिन के दौरे के दौरान बेंगलुरु में कैंपेगौड़ा एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 को लॉन्च करेंगे, जिससे लगभग 5000 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है।
 terminal2 को गार्डन सिटी ऑफ बेंगलुरु के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में डिजाइन किया गया है।
 इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलुरु के क्रांतिवीर संगोल्ली रायन्ना रेलवे स्टेशन में चेन्नई मैसूर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे, दक्षिण भारत में इस तरह की यह
पहली ट्रेन होगी।

 दीक्षांत समारोह के बारे में 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2900 करोड़ रुपए के अधिक लागत से बनी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में ओएनजीसी की यू फील्ड ऑन शोर डीप वाटर ब्लॉक प्रोजेक्ट को लांच करेंगे।
 गेल GAIL की श्रीकाकुलम अंगुल नेचुरल गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट की आधारशिला भी प्रधानमंत्री द्वारा रखी जाएगी।
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामागुंडम में एक फर्टिलाइजर प्लांट को देश के लिए समर्पित करेंगे।
 तमिलनाडु के गांधी ग्राम में वे गांधी ग्राम ग्रामीण संस्थान में 36 वें दीक्षांत समारोह को में शामिल होकर छात्रों को संबोधित करेंगे दीक्षांत समारोह में 2300 से अधिक छात्रों को डिग्रियां दी जाएगी।

 

LVM-3 Feature, रॉकेट एलवीएम-3 हुआ और भी ज्यादा ताकतवर, जाने इसके फिचर के बारे में

 

LVM-3 Feature : भारत के सबसे भारी रॉकेट लॉन्च व्हीकल मार्ग 3 (lvm 3) की अंतरिक्ष में उपग्रह व उपकरण प्रक्षेपित करने की क्षमता को 450 किलो तक बढ़ाई गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने इसके क्रायोजेनिक इंजन सीई20 का फ्रेश टेस्टिंग सफल किया था। यह इंजन भारत में ही बनाया गया है। इसरो ने यह बताया है कि पहली बार थ्रर्स्ट लेवल को बढ़ाकर 21.8 टन पर हॉट टेस्ट किया गया है। हॉट टेस्ट का अर्थ है इंजन के संचालन से जुड़े सभी पैरामीटर का हंड्रेड परसेंट टेस्टिंग, जिसमें इंजन की रियल कैपेसिटी नापी जाती है। टेस्टिंग के दौरान इंजन ने पहले 40 सेकंड तक करीब 20 टन थ्रर्स्ट लेवल पर काम किया है। इसके बाद इसे थ्रस्ट कंट्रोल वाल्व टीसीवी की मदद से 21.8  टन तक पहुंचाया गया है। टेस्टिंग में इंजन और उसके प्रदर्शन सामान्य पाए गए हैं। इसरो के मुताबिक एलवीएम 3 की उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने की क्षमता बढ़ाने में इस टेस्ट से मदद मिलेगी। यह वृद्धि 450 किलो तक हो सकती है। इसके साथ ही एक्स्ट्रा प्रोपेलेंट भी लोड किया जाएगा। 

3 स्टेज का रॉकेट के बारे में

 एलवीएम 3 तीन स्टेज का रॉकेट है, जिसमें 4 टन तक के उपग्रह एवं उपकरण जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट GTO में पहुंचाने की क्षमता है। GTO समुद्र सतह से 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर माना जाता है।

क्या बदलाव किया गया है

  इसरो के मुताबिक पुराने इंजनों के मुकाबले सी20 में बड़े बदलाव हुए हैं। इनमें शामिल है उससे रॉकेट के की शक्ति को कंट्रोल करता है। 3D प्रिंटर से लिक्विड ऑक्सीजन और हाइड्रोजन ईंधन टरबाइन एग्जॉस्ट केसिंग बनाई गई है, इन्हें इंजन में पहली बार लगाया गया है।

 

UGC Revises Rule For PhD Admission, यूजीसी ने पीएचडी ने एडमिशन को लेकर क्या बदलाव किए हैं

 

 UGC Revises Rule For PhD Admission : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने पीएचडी में प्रवेश लेने के लिए दाखिला नियमों को रिवाइज्ड किया है। दाखिला नियमों में यह संशोधन इसलिए किया गया है ताकी 4 साल अंडर ग्रैजुएट डिग्री होल्डर जो कम से कम 7.5 सीजीपीए हैं उन्हें पीएचडी प्रोग्राम आधिकारिक तौर पर ज्वाइन करवाई जा सके। इसके अलावा प्रोफेशनल भी पार्ट टाइम डिग्री रिसर्च कोर्स इस संशोधन के माध्यम से कर सकें। इसके अलावा यूजीसी ने नेट और जेआरएफ क्वालीफाई के लिए 60 परसेंट सीट आरक्षित करने के फैसले को लेकर प्रस्ताव को रोक दिया है। इस संशोधन के बारे में यूजीसी के चेयरमैन ने यह कहा है कि आरक्षण को लेकर हितधारियों के सुझाव को ध्यान में रखकर विचार नहीं किया जाएगा।

 नए नियमों के बारे में 

जिन उम्मीदवारों के पास 4 साल की डिग्री या उनके कम से कम 7.5 सीजीपीए हैं, वह पीएचडी में दाखिला ले सकते हैं। 
इसके अलावा 4 साल के डिग्री और पीजी पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के पहले या दूसरे साल के स्टूडेंट्स भी पीएचडी के लिए ऐडमिशन ले सकते हैं। 
नए नियम के अनुसार प्रोफेशनल भी पार्ट टाइम के तौर पर पीएचडी प्रोग्राम में भाग ले सकते हैं, लेकिन एडमिसन के लिए उन्हें अपने साथ नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट एनओसी भी लाना होगा। एनओसी में यह जरूर लिखा होना चाहिए कि उसकी ऑफिशियल ड्यूटी उसे यह करने की इजाजत देती है, जिससे वह रिसर्च के लिए जरूर समय निकाल सके, इसके अलावा अगर जरूरत हो तो कोर्स वर्क के लिए उसे ड्यूटी से रिलीव भी किया जाए।

 

World Kindness Day, विश्व दयालुता दिवस का इतिहास और महत्व क्या हैं

 

World Kindness Day 2022 : हर साल 13 नवंबर को वर्ल्ड काइनेस डे यानी विश्व दयालुता दिवस मनाया जाता है। विश्व दयालुता दिवस सकारात्मक शक्ति और दया की डोर पर हो रहे समाज में अच्छे कार्यों को उजागर करने के लिए लोगों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करता है। दया मानव परिस्थितियों का मूलभूत हिस्सा है जो नस्ल, धर्म, राजनीति, लिंग, ऊंच-नीच, अमीर - गरीब की भावनाओं से परे है। विश्व दयालुता दिवस का थीम साल 2021 में विश्व हम बनाते हैं दयालुता को प्रेरित करते हैं रखा गया था। विश्व दयालुता दिवस की शुरुआत साल 1998 में वर्ल्ड का काइंडनेस मूवमेंट संगठन के द्वारा शुरू की गई थी, इसकी स्थापना 1997 के टोक्यो सम्मेलन में दुनियाभर के  काइंडनेस ऑर्गनाइजेशन द्वारा की गई थी। साल 2019 में इस ऑर्गेनाइजेशन को इस कानून के तहत एक ऑफिशियल एनजीओ के रूप में रजिस्टर भी किया गया था। इसके साथ वर्ल्ड में 8 से अधिक देश शामिल हैं, जिनका अन्य किसी भी धर्म या राजनैतिक आंदोलन से संबंध नहीं है।

विश्व दयालुता दिवस का इतिहास क्या है

विश्व दयालुता दिवस एक अंतरराष्ट्रीय साक्षात्कार है जो हर साल 13 नवंबर के दिन मनाया जाता है। विश्व काइंडनेस मूवमेंट 1958 में देश की दयालुता और गैर सरकारी संगठनों के गठबंधन में पेश किया गया था। जापान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, नाइजीरिया जैसे कई देशों में विश्व दयालुता दिवस मनाया जाता है। साल 2009 में सिंगापुर में पहली बार यह दिन मनाया और भारत एवं इटली ने भी विश्व दयालुता दिवस मनाता है। यूके में डेविड जमिलली ने दया दिवस ब्रिटेन की सह - स्थापना की है। साल 2010 में माइकल लॉयड-व्हाइट के अनुरोध पर  NSW   Federation  के पेरेंट्स और नागरिक संघ ने  NSW स्कूल कैलेंडर के बारे में NSW विभाग के एजुकेसन मिनिस्टर को विश्व दया दिवस को अवगत करने के लिए था।
 दया के बारे में बड़े-बड़े महापुरुषों और संतों ने अपने विचार रखे हैं आइए जानते हैं इनके बारे में
दया सबसे बड़ा धर्म है - महाभारत 

जहां दया तहं धर्म है, जहं लोभ तहं पाप 
जहां क्रोध तहं काल है जहां क्षमा आप - कबीर दास 

दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है - प्रेमचंद 

दया के छोटे-छोटे से कार्य, प्रेम के जरा जरा से शब्द हमारी पृथ्वी को स्वर्गोपम बना देते हैं- जूलिया कार्नी 

 मुझे दया के लिए भेजा है शाप देने के लिए नहीं - हजरत मोहम्मद 

जो असहाय पर दया नहीं करता, उसे शक्तिशालियों के अत्याचार सहने पड़ते हैं- शेख सादी

 

World Pneumonia Day, निमोनिया दिवस का इतिहास, महत्व और उद्देश्य क्या है

 

World Pneumonia Day : निमोनिया की समस्या छोटे बच्चों में ज्यादा देखी गई है, लेकिन यह किसी भी उम्र के व्यक्ति के शरीर में हो सकती है। निमोनिया एक ऐसा इंफेक्शन है जो फेफड़े में होता है, फेफड़े में जब पानी या मवाद भरने से सांस लेने में परेशानी, मवाद और कफ की समस्या बढ़ जाती है तो उस स्थिति को निमोनिया कहा जाता है। समय रहते इसका इलाज न करवाने पर यह गंभीर रूप ले लेती है। अगर समय रहते निमोनिया का इलाज करवाया जाए तो मरीज ठीक भी हो सकता है। नवजात शिशु में ज्यादातर निमोनिया के केसेस देखे गए हैं। निमोनिया के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के लिए वरदान 12 नवंबर को आएगा विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है।
 
विश्व निमोनिया दिवस का इतिहास क्या है 

विश्व निमोनिया दिवस पहली बार 12 नवंबर साल 2009 को ग्लोबल कोएलिशन अगेंस्ट चाइल्ड निमोनिया के द्वारा मनाया गया था। तब से लेकर आज तक हर साल को एक नई थीम के साथ इस दिन को मनाया जाता है। इस दिन तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक किया जाता है।

निमोनिया क्या है 

निमोनिया सांस जुड़ी एक ऐसी गंभीर समस्या है जिसमें फेफड़े में इंफेक्शन होता है। निमोनिया होने पर लंग्स में सूजन आती है और कई बार पानी भी भर जाता है। निमोनिया वायरस बैक्टीरिया और कवक सहित कई संक्रामक एजेंट के कारण होता है।
निमोनिया होने के लक्षण क्या हैं 

निमोनिया होने पर शुरुआत में सर्दी, जुकाम देखे गए हैं जब फेफड़ों में इन्फेक्शन तेजी से बढ़ता है तो तेजी से बुखार भी होता है। सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द की शिकायत बढ़ती है, ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चे को बुखार नहीं आता है लेकिन खांसी और सांस लेने में बहुत परेशानी होती है।
निमोनिया के बारे में फैक्ट 

विश्व में निमोनिया 5 साल से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का मुख्य कारण होता है। निमोनिया से साल 2005 में 5 साल से कम आयु वर्ग के 920136 बच्चों की मृत्यु हुई थी जो कि 5 साल के उम्र के बच्चों की मृत्यु 16 परसेंट है।
विश्व निमोनिया दिवस का उद्देश्य क्या है 

विश्व निमोनिया दिवस मनाने का एकमात्र उद्देश्य यह है कि लोगों को इस बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना और बताना कि इसका इलाज संभव है, अगर समय रहते प्रयास करें तो साथ ही निमोनिया किस कारणों से होती है, इसका इलाज क्या है सभी विषय के बारे में विस्तार से लोगों को जागरूक करना है, साथ ही समय रहते निमोनिया के लक्षणों को पहचान कर इसका इलाज करवाया जा सकता है।

 

13-11-2022

 

बाल दिवस क्यों मनाया जाता है, जाने इसका इतिहास और महत्व 

Children's Day : हर साल 14 नवंबर को भारत में बाल दिवस मनाया जाता है। इस दिन को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस के अवसर पर मनाया जाता है। इस खास दिन को लोग बाल दिवस के रूप में जानते हैं, बच्चे से जवाहरलाल नेहरू का बहुत प्रेम था, इसलिए बच्चे उन्हें  प्यार से चाचा नेहरू बुलाते थे। भारत में बाल दिवस को राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मनाया जाता है। 14 नवंबर 1889 को जन्मे जवाहरलाल नेहरू देश की पहले प्रधानमंत्री थे और उनका मानना था कि बच्चे देश की ताकत एवं समाज के भविष्य होते हैं।  अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं   FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here

 बाल दिवस का इतिहास क्या है 


अलग-अलग देशों में बाल दिवस अलग-अलग दिन के अनुसार मनाया जाता है, लेकिन भारत में यह दिन 14 नवंबर को मनाया जाता है। साल 1964 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मृत्यु के बाद सभी की सहमति से 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में घोषित किया गया जिसके बाद हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। साल 1924 से ही विश्व स्तर पर बाल दिवस  मनाया जाता है, लेकिन यह 20 नवंबर 1954 को यूएन ने इसे मनाने की घोषणा दी थी। Free Daily Current Affair Quiz-Attempt Now with exciting prize

 बाल दिवस का महत्व क्या है 


बाल दिवस देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ बच्चों के लिए उनके अधिकारों एवं उनके उज्जवल भविष्य के हित के लिए मनाया जाता है। इस दिन बच्चों के सामाजिक स्थिति को बढ़ाने एवं उनके अधिकार और पढ़ाई शिक्षा को लेकर विशेष चिंतन व्यक्त किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि देश का विकास एवं उज्जवल भविष्य बच्चों पर ही टिका होता है। कोविड-19 महामारी के दौरान देश में बच्चों के ऊपर इस महामारी का बहुत बुरा असर हुआ था, उनकी पढ़ाई स्कूल और खेल पर इसका प्रभाव बहुत गहरा पड़ा था। बहुत से बच्चे कोरोना  के चलते अनाथ हो गए थे जिसका असर उनके शिक्षा खेल एवं संपूर्ण जीवन पर पड़ा था। 

10 facts about Pt. Jawaharlal Nehru, पंडित जवाहरलाल नेहरु से जुड़े महत्वपूर्ण फैक्ट

 
10 facts about Pt. Jawaharlal Nehru : पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। जवाहरलाल नेहरु हैरो और कैंब्रिज से पढ़ाई करने के बाद 1912 में एट लॉ की डिग्री हासिल की और बार में बुलाए गए।
 पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस पार्टी के 6 बार अध्यक्ष पद को संभालने वाले कार्यकर्ता थे, (लाहौर 1929, लखनऊ 1936, फैजपुर 1947, दिल्ली 1951, हैदराबाद 1953 और कल्याण 1954 में यहां से जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेश के अध्यक्ष पद को संभाला था।
 
 
1. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जवाहरलाल नेहरू को 9 अगस्त 1942 को मुंबई में गिरफ्तार किया गयै और अहमदनगर जेल में इन्हें रखा गया था, जहां इन्हें 15 जून 1945 को रिहा किया गया।
 
2. बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू देश को प्रगति और विकास के पथ पर ले जाने वाले खास पथ प्रदर्शक व्यक्ति थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना राष्ट्र एवं संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थाई भाव देना और योजनाओं के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू और विकास करना ही इनका मुख्य उद्देश्य रहा था।
 
3. पंडित जवाहरलाल नेहरू शुरू से ही गांधी जी से प्रभावित थे और 1912 में कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे, 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चा को संगठित करने का श्रेय पंडित जवाहरलाल नेहरू को जाता है।
 
4. 1928 में लखनऊ में साइमन कमीशन के विरोध में नेहरू जी घायल हुए और 1930 के नमक आंदोलन में इन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने इसके लिए 6 महीने की सजा काटी और 1935 में अल्मोड़ा जेल में इन्होंने आत्मकथा लिखी थी।
 
5. उन्होंने कुल 9 बार जेल की यात्रा की। जवाहरलाल नेहरु ने विश्व भ्रमण किया और अंतरराष्ट्रीय नायक के रूप में जाने गए।
 
6. नेहरू जी ने पंचशील का सिद्धांत प्रतिपादित किया और 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किए गए।
 
7. नेहरु जी ने तटस्थ राष्ट्रों को संगठित किया और इनका नेतृत्व भी किया था।  स्वाधीनता की लड़ाई को चलाने के लिए की जाने वाली कार्यवाही का खास प्रस्ताव तो एकमत से प्राप्त हो गया था, खास प्रस्ताव इत्तेफाक से 31 दिसंबर की आधी रात के घंटे की चोट के साथ जबकि पिछले साल की जगह नया साल आ रहा था तब मंजूर हुआ।
 
8. पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद सर्वपल्ली राधा कृष्ण ने कहा था, जवाहरलाल नेहरू हमारे पीढ़ी के एक महान व्यक्ति थे वे एक ऐसे अद्वितीय राजनीतिज्ञ थे जिनकी मानव मुक्ति की प्रति सेवाएं किरण स्मरणीय रहेंगी।
 
9. स्वाधीनता संग्राम के योद्धा के रूप में यशस्वी और आधुनिक भारत के निर्माता थे मैथिलीशरण गुप्त की कविताएं में नेहरू जी के संबंध में यह खास पंक्तियां लिखी गई थी
 
हम कोटि-कोटि कुटुंबियों की और विश्व विशाल की
सुख - शांति - चिंता थी, तुम्हारी सहचारी चिरकाल की
 तुम जागते थे रात में भी, जबकि सोते थे सभी
जन मात्र की सच्ची विजय है, यह जवाहरलाल की
 
10.आजादी के पहले गठित अंतरिम सरकार और आजादी के बाद 1947 में प्रधान भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को बनाया गया और 27 मई 1964 को उनके निधन तक यह इस पद पर बने रहे।
 

World  Diabetes Day : वर्ल्ड डायबिटीज डे का थीम, इतिहास और उद्देश्य क्या है

 World  Diabetes Day, डायबिटीज के मरीज दुनिया में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में हर साल डायबिटीज से करीब 400000 मरीजों की हर साल मौत होती है इसलिए वैश्विक स्तर पर लोगों को मधुमेह डायबिटीज के विषय में जागरूक करने और शिक्षित करने एवं डायबिटीज के उपचार निदान और देखभाल के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल विश्व स्तर पर 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। डायबिटीज शरीर में इंसुलिन का बैलेंस बिगड़ने से होता है इस हेल्थ प्रॉब्लम को लोग ज्यादातर मधुमेह या शुगर के बीमारी के नाम से जानते हैं। इंसुलिन के खोजकर्ता डॉक्टर फ्रेड्रिक बैंटिंग के जन्म दिवस के अवसर पर विश्व मधुमेह दिवस (वर्ल्ड डायबिटीज डे) मनाया जाता है। हर साल 14 नवंबर को मधुमेह दिवस मनाया जाता है।
 वर्ल्ड डायबिटीज डे का इतिहास क्या है 

विश्व में डायबिटीज डे पहली बार साल 1991 में मनाया गया था। इसकी घोषणा अंतरराष्ट्रीय मधुमेह महासंघ, (इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन) और विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ द्वारा किया गया था। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने लोगों के बीच डायबिटीज के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। 

डायबिटीज डे 2022 थीम

 इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन विश्व मधुमेह दिवस के अवसर को मनाने के लिए एक थीम रखता है। इस साल की मधुमेह दिवस की थीम - देख भाल तक पहुंच के बड़े बहु वर्षीय विषय के तहत मधुमेह शिक्षा तक पहुंच रखी गई है। इस थीम का उद्देश्य है कि लोगों को सही समय पर सही इलाज और इसकी सही जानकारी मिल सके। आजकल के व्यस्त लाइफस्टाइल और बदलते खान-पान के कारण डायबिटीज की समस्या एक आम बीमारी हो गई है, यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होती है। इसलिए डब्ल्यूएचओ लोगों को हर साल जागरूक करने के लिए एवं इससे होने वाले नुकसान और सही इलाज और सावधानी को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाता है।
 वर्ल्ड डायबिटीज डे सिग्निफिकेंट 


दुनिया भर के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक पहल शुरू की है जिसका उद्देश्य डायबिटीज पेशेंट की सही समय पर सही उपचार और सही कीमतों पर एक जैसा इलाज की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण उपचार और देखभाल तक पहुंच हो की शुरुआत की है।

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