Competition Commission of India: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग क्या है? जाने इसकी संरचना, भूमिका और कार्य के बारे में

Safalta Experts Published by: Nikesh Kumar Updated Wed, 30 Mar 2022 03:37 PM IST

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भारत सरकार का एक वैधानिक निकाय है. इस निकाय का विधिवत गठन मार्च 2009 में किया गया था. प्रतिस्पर्धा आयोग भारत में 2002 में पारित प्रतिस्पर्धा अधिनियम को लागू करने के लिए जिम्मेदार है. राघवन समिति की सिफारिशों पर एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (MRTP अधिनियम) को निरस्त कर करके इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था. यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं  FREE GK EBook- Download Now.
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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का उद्देश्य -
  • उपभोक्ताओं, उद्योग, सरकार और अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों सहित सभी हितधारकों के साथ सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से, और,
  • प्रवर्तन में व्यावसायिकता, पारदर्शिता, संकल्प और विवेक के माध्यम से,
एक मजबूत प्रतिस्पर्धी माहौल स्थापित करना है.

प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002
  • प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 में पारित किया गया था. 2007 में इसे प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 द्वारा संशोधित किया गया.
  • यह अधिनियम उन सभी गतिविधियों पर रोक लगाता है या उनको नियंत्रित करता है जो कि भारत में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. उदहारण स्वरुप प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों, उद्यमों द्वारा प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग पर रोक लगाना और संयोजनों (अधिग्रहण, नियंत्रण का अधिग्रहण और एम एंड ए) को नियंत्रित करना.
  • संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना की गई.
  • सरकार ने 2017 में प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (COMPAT) को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया.

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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की संरचना
  • प्रतिस्पर्धा अधिनियम के अनुसार प्रतिस्पर्धा आयोग में एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं. इन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है.
  • प्रतिस्पर्धा आयोग एक अर्ध-न्यायिक निकाय है जो कि वैधानिक अधिकारियों को राय देता है और अन्य मामलों का भी निपटारा करता है.
  • अध्यक्ष और अन्य सदस्य आयोग के पूर्णकालिक सदस्य होते हैं.
  • सदस्यों की योग्यता: अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य क्षमता, और सत्यनिष्ठा वाले व्यक्ति होने चाहिए जो कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने योग्य हों, या, जिनके पास विशेष ज्ञान हो, और जिनके पास अंतरराष्ट्रीय व्यापार, अर्थशास्त्र, व्यवसाय, वाणिज्य, कानून, वित्त, लेखा, प्रबंधन, उद्योग, सार्वजनिक मामलों, प्रशासन या किसी अन्य किसी सम्बंधित क्षेत्र (जो कि केंद्र सरकार की राय में आयोग के लिए उपयोगी हो) में कम से कम पंद्रह वर्ष का पेशेवर अनुभव हो.
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के कार्य और भूमिका
  • प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली प्रथाओं को समाप्त करना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और भारत के बाजारों में व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना.
  • किसी भी कानून के तहत स्थापित वैधानिक प्राधिकरण से प्राप्त संदर्भ पर प्रतिस्पर्धा के मुद्दों पर राय देना, जन जागरूकता पैदा करना और प्रतिस्पर्धा के मुद्दों पर प्रशिक्षण देना.
  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित उपाय करता है:
  • उपभोक्ता कल्याण: बाजारों को उपभोक्ताओं के लाभ और कल्याण के लिए काम करने के लिए
  • अर्थव्यवस्था के तेज और समावेशी विकास के लिए देश की आर्थिक गतिविधियों में निष्पक्ष और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना.
  • आर्थिक संसाधनों का सबसे कुशल उपयोग हो यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिस्पर्धा नीतियों को लागू करना
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा संस्कृति को स्थापित और पोषित करने के लिए सभी हितधारकों के बीच प्रतिस्पर्धा का पक्षसमर्थन करना और प्रतिस्पर्धा के लाभों के बारे में जानकारी का प्रसार करना.
  • प्रतिस्पर्धा आयोग भारत का प्रतिस्पर्धा नियामक है. छोटे संगठन जो कि बड़े निगमों के खिलाफ अपना बचाव करने में असमर्थ हैं उनके लिए प्रतिस्पर्धा आयोग एक अविश्वास प्रहरी की तरह काम करता है.
  • भारत को संसाधन बेचने वाले ऐसे संगठन जो भारत के घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं; भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग के पास ऐसे संगठनों को नोटिफाई करने का अधिकार है.
  • प्रतिस्पर्धा अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी एंटरप्राइज आपूर्ति के नियंत्रण को प्रभावित करके, खरीद की कीमतों में हेरफेर इत्यादि करके बाजार में अपनी 'प्रमुख स्थिति' का दुरुपयोग ना करे.
  • अधिग्रहण या विलय के माध्यम से भारत में प्रवेश करने वाली विदेशी कंपनी द्वारा देश के प्रतिस्पर्धा कानूनों का पालन करवाना भी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के कार्यों में शामिल है.
  • एक निश्चित मौद्रिक मूल्य से ऊपर की संपत्ति और कारोबार किसी समूह को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के दायरे में ले आता है.
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हमें प्रतिस्पर्धा कानूनों की आवश्यकता क्यों है?

प्रतिस्पर्धा कानून समाज में तीन मुख्य कार्य करते हैं, मुक्त उद्यम को बनाए रखना: प्रतिस्पर्धा कानूनों को मुक्त उद्यम का मैग्ना कार्टा कहा गया है। बाजार की विकृतियों के खिलाफ सुरक्षा: विभिन्न लोगों द्वारा अपने प्रमुख पदों का दुरुपयोग करके बाजार की विकृतियों का सहारा लेने और प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों का सहारा लेने का जोखिम निरंतर बना रहता है. यह सुनिश्चित करने के लिए की बाजार विभिन्न विकृतियों से सुरक्षित है, हमें प्रतिस्पर्धा कानूनों की आवश्यकता है.

वे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने में भी सहायता करते हैं: यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिस्पर्धा कानूनों की आवश्यकता है कि वैश्वीकरण में वृद्धि के साथ घरेलू उद्योग दबकर कहीं पीछे ना रह जाएं. प्रतिस्पर्धा कानून घरेलू उद्योगों की व्यवहार्यता का निर्धारण करने में एक सर्वोत्कृष्ट भूमिका निभाते हैं. हालाँकि, भारतीय प्रतिस्पर्धा कानूनों को डिजिटल दुनिया के व्यवसायों के साथ अद्यतन रखने के लिए, जिसमें बहुत अधिक संपत्ति शामिल नहीं है, भारत सरकार ने एक प्रतिस्पर्धा कानून समीक्षा समिति की भी स्थापना की है.

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग - हाल के समाचार

1) 5 और 6 नवंबर, 2020 को, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने मोटर वाहन के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के मुद्दों पर ब्रिक्स प्रतिस्पर्धा (BRICS कम्पटीशन) एजेंसियों की एक वर्चुअल वर्कशॉप (आभासी कार्यशाला) का आयोजन किया. इससे पहले, ब्रिक्स प्रतिस्पर्धा एजेंसियों ने मई 2016 में प्रतिस्पर्धा कानून और नीति के क्षेत्र में सहयोग और बातचीत को बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे (जो 2020 में एक ओपन-एंड अवधि के लिए विस्तारित किया गया)

2) अभी हाल ही में 15 स्टार्टअप संस्थापकों के एक समूह ने भारत में Google की प्रतिस्पर्धा-विरोधी नीतियों के बारे में नियामक को अवगत कराने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के साथ एक आभासी बैठक की. Google द्वारा हाल ही में भारतीय डेवलपर्स पर अपने Play Store बिलिंग सिस्टम को लागू करने के साथ-साथ सिस्टम के माध्यम से डिजिटल सामान और सेवाओं को बेचने के लिए कंपनी द्वारा 30% कमीशन लेने की बात चर्चा में रही.

3) भौतिक आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, सीसीआई ने तुरंत अपनी प्रक्रियाओं को लचीला बनाने की अनुमति दे दी - जिसमें एंटीट्रस्ट मामलों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग के साथ-साथ ग्रीन चैनल नोटिफिकेशन और गैर-जरूरी मामलों को स्थगित करने सहित संयोजन नोटिस शामिल है. सीसीआई ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संयोजनों के लिए प्री-फाइलिंग कंसल्टेशन (पीएफसी) सुविधा भी उपलब्ध कराई. महामारी के दौरान स्टाकहोल्डर्स के प्रश्नों में भाग लेने के लिए एक डेडिकेटेड  हेल्पलाइन भी स्थापित की गई थी. रिलेवेंट स्टाकहोल्डर्स की जानकारी के लिए नियमित रूप से सीसीआई की वेबसाइट पर प्रासंगिक पब्लिक नोटिस डाले जाते थे. सीसीआई ने फिजिकल कांटेक्ट और उपस्थिति से बचने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही करने के लिए एक मैकेनिज्म भी स्थापित किया है.

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प्रतिस्पर्धा अधिनियम कब पारित और कब संशोधित किया गया ?

प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 में पारित किया गया था. तथा 2007 में इसे प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 के द्वारा संशोधित किया गया था.

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के मुख्य कार्य क्या हैं ?

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के मुख्य कार्य प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली प्रथाओं को समाप्त करना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और भारत के बाजारों में व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है .

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