NCERT CBSE Class 10th Hindi (Sparsh) Chapter 9: आत्मत्राण

Safalta Expert Published by: Sylvester Updated Fri, 17 Jun 2022 01:43 PM IST

Highlights

NCERT CBSE Class 10th Hindi (Sparsh) Chapter 9: आत्मत्राण

रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रस्तुत कविता का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने किया है । द्विवेदी जी का हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अपूर्व योगदान है ।

प्रस्तुत कविता में कवि गुरु मानते हैं कि प्रभु में सब कुछ संभव कर देने की सामर्थ्य है , लेकिन वही सब कुछ न करें । किसी भी आपदा – विपदा में , किसी भी द्वंद्व में सफल होने के लिए मनुष्य स्वयं संघर्ष करे । प्रभु केवल उसे संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करें ।

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सुख के दिनो मे कवि क्या करना चाहता है ?

ईश्वर को स्मरण

रवीन्द्र नाथ की कविता की शैली कैसी है ?

भावात्मक और आत्म कथात्मक

कवि संकटो का सामना किसकी मदद से करना चाहता है ?

स्वयं

सुख के दिनों में कवि क्या चाहता है?

विनम्र होकर ईश्वर का हर पल आसपास अनुभव करे

निखिल मही द्वारा वंचना करने का आशय स्पष्ट कीजिए।

सारी धरती के लोगों द्वारा दुख में साथ छोड़ कर उसे धोखा देना

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